Sunday, 2 April 2017

एनडीटीवी चैनल के तथाकथित पत्रकार रवीश कुमार के परिवार के एक और सदस्य को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। भाई के सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद अब बारी बहन की है।

 रवीश कुमार की बहन हैं, आरोप सुनकर शर्म आएगी

एनडीटीवी चैनल के तथाकथित पत्रकार रवीश कुमार के परिवार के एक और सदस्य को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। भाई के सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद अब बारी बहन की है। कथित तौर पर रवीश कुमार की बहन नीता कुमारी पांडेय एक बड़े घोटाले में फंसी हैं और उन्हें नौकरी से निलंबित किया गया है। मामला बिहार का ही है, लिहाजा अभी तक इस मामले में मोदी या बीजेपी की साजिश की थ्योरी नहीं दी जा सकी है। नीता कुमारी पांडेय का संबंध बिहार के शिक्षा माफिया से बताया जा रहा है। इसी के दम पर वो बार-बार पकड़े जाने के बाद भी हर बार कमाऊ पोस्टिंग पाती रही हैं। एक स्थानीय पत्रकार कुंदन कुमार ने नीता के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया। उन्होंने फेसबुक पर सबूतों और दस्तावेजों के साथ पूरी कहानी खोलकर रख दी है। इससे पहले रवीश कुमार के सगे भाई ब्रजेश कुमार पांडेय भी सेक्स स्कैंडल चलाने के आरोपी हैं और अब तक वो फरार हैं । हैरानी की बात ये है कि ऐसे भाई-बहनों के बावजूद रवीश कुमार टीवी पर बैठकर लोगों को सच्चाई और ईमानदारी का ज्ञान देते रहे।

क्या है पूरा मामला?

रवीश कुमार की बहन नीता कुमारी पांडेय बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सर्वशिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम अधिकारी थीं। उन पर कुछ वक्त पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। राज्य सरकार की तरफ से कराई गई जांच सही पाई गई और उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया है। मुजफ्फरपुर के स्थानीय पत्रकार कुंदन कुमार ने इस बारे में फेसबुक पर पोस्ट (नीचे देखें) लिखकर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि “जिले के एक राजकीय मध्य विद्यालय में भवन के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार पर मैंने जब तफतीश शुरू की थी, तब नीता कुमारी पांडेय ने मेरे हर आरोप को यह कहकर खारिज कर दिया था कि विद्यालय की बिल्डिंग के निर्माण में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। जबकि नंगी आंखों से देखा जा सकता था कि बिल्डिंग बनाने में बड़े पैमाने पर लूट हुई थी और छोटे-छोटे बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया था। ये पहला मौका नहीं है जब नीता कुमारी पांडेय भ्रष्टाचार के केस में निलंबित हुई है। सर्व शिक्षा अभियान से पूर्व वो जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) मुजफ्फरपुर के पद पर भी नियुक्त थीं। उन्होंने वहां पर अवैध निकासी और अवैध शिक्षकों की बहालियां की थीं। जिसकी जांच में भी आरोप सही पाए गए और काफी वक्त सस्पेंड रहीं। पैसे की वसूली और ऊपर तक उसके बंटवारे की एक्सपर्ट मानी जाने वाली इस भ्रष्ट और कुटिल महिला को हमेशा से राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा है। बार-बार करप्शन के केस में फंसने के बावजूद वो मनचाहे पदों पर नियुक्ति पाती रही और सरकारी पैसों की लूट को जारी रखा। मुझे पूरा भरोसा है कि बिहार के सुशासक जल्दी ही उन्हें नई जिम्मेदारी देकर परम उद्देश्यों के लिए दोबारा स्थापित कर देंगे।”
दरअसल केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले तक रवीश कुमार बहुत खुशमिजाज किस्म के पत्रकार हुआ करते थे। तमाम घपलों-घोटालों के बावजूद वो कभी कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ उतने आक्रामक नजर नहीं आते थे, जितने मोदी सरकार के लगभग हर काम को लेकर रहते हैं। रवीश कुमार ने ईमानदारी का ऐसा चोला ओढ़ा कि बड़े-बड़े लोग गच्चा खा गए। कांग्रेस के अलावा उन्होंने लगभग सभी गैर-बीजेपी पार्टियों के पक्ष में खबरें देने और उनके लिए माहौल बनाने का काम किया है। यही कारण है कि खुद रवीश कुमार की विश्वसनीयता दर्शकों की नजर में संदिग्ध हो चुकी है।
नीचे आप पत्रकार कुंदन कुमार की फेसबुक पोस्ट देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने विस्तार से पूरे मामले की जानकारी दी है।


बिहार के शिक्षा विभाग की तरफ से जारी निलंबन पत्र

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