श्रीराम के अलावा इन चार से भी हार चुका था रावण
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण श्रीराम के अलावा भगवान शंकर, राजा बलि, बाली और सहस्त्रबाहु से भी पराजित हो चुका था।
भगवान शंकर ने तोड़ा था रावण का अहंकार
रावण को अपनी शक्ति का अहंकार इस कदर हुआ कि वह शिव को हराने कैलाश पर्वत पहुंच गया। रावण ने शिवजी को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन शिवजी ध्यान में लीन थे। रावण कैलाश पर्वत को उठाने लगा। तब शिवजी ने पैर के अंगूठे से ही कैलाश का भार बढ़ा दिया, इस भार को रावण उठा नहीं सका और उसका हाथ पर्वत के नीचे दब गया।
तब रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत्र की रचना की। शिवजी इस स्त्रोत्र से बहुत प्रसन्न हो गये और रावण को मुक्त कर दिया था।
बाली से रावण की हार
किस्किंधा के राजा और सुग्रीव के बड़े भाई बाली अत्यंत शक्तिशाली थे। एक बार बाली पूजा कर रहा था, उसी दौरान रावण वहां पहुंच गया और युद्ध के लिये ललकारा। तब बाली ने रावण को अपनी बाजू में दबा चार समुद्रों की परिक्रमा की। अपनी पूजा के दौरान बाली ने रावण को अपने बाजू में ही दबाये रखा। पूजा के बाद बाली ने रावण को छोड़ दिया था।
सहस्त्रबाहु से रावण की हार
सहस्त्रबाहु के एक हजार हाथ थे और इसी वजह से उसका नाम सहस्त्रबाहु पड़ा था। जब रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंचा तो उसने अपने हजार हाथों से नर्मदा नदी के बहाव को रोक दिया था। सहस्त्रबाहु ने नर्मदा का पानी इकट्ठा किया और पानी छोड़ दिया, जिससे रावण पूरी सेना के साथ ही नर्मदा में बह गया था। इस पराजय के बाद एकबार फिर रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंच गया था, तब सहस्त्रबाहु ने उसे बंदी बनाकर जेल में डाल दिया था।
राजा बलि के महल में रावण की हार
दैत्यराज बलि पाताल लोक के राजा थे। रावण राजा बलि से युद्ध करने के लिए पाताल लोक में उनके महल तक पहुंच गया था। वहां पहुंचकर रावण ने बलि को युद्ध के लिए ललकारा, उस समय बलि के महल में खेल रहे बच्चों ने ही रावण को पकड़ कर घोड़ों के साथ अस्तबल में बांध दिया था। इस प्रकार राजा बलि के महल में रावण की हार हुई थी
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