Sunday, 19 February 2017

विद्यालयाें में पढ़ाया जाना चाहिए रामायण-महाभारत

विद्यालयाें में पढ़ाया जाना चाहिए रामायण-महाभारत : शशि थरूर  


  लखनऊ : कांग्रेस के सांसद शशि थरूर का मानना है कि, महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों को धार्मिक ग्रंथों की तरह नहीं, बल्कि साहित्य की तरह पढ़ाया जाना चाहिए। थरूर यह भी मानते हैं कि, इन महाकाव्यों की सूझबूझ से सांप्रदायिक बंटवारे को समाप्त किया जा सकता है। लखनऊ के श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में शनिवार को आयोजित साहित्यिक सम्मेलन के दौरान अपनी किताब ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस’ पर आयोजित संवाद के दौरान थरूर ने ये बातें कहीं।

छात्रों को ब्रिटिश राज की विरासत के ‘प्रतीक’ शेक्सपियर की किताबें पढ़ाना कितना उचित है ? यह पूछे जाने पर, थरूर ने कहा, ‘शेक्सपियर पढ़ाया जाना चाहिए, परंतु साथ में संस्कृत के कवियों और कालिदास जैसे लेखकों की रचनाओं को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए। दुनिया के किसी भी अन्य महान लेखक की तुलना में कालिदास किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं थे।’ उन्होंने कहा कि, कालिदास को विद्यालयीन पाठ्यक्रम से बाहर रखकर हम नई पीढ़ी को उनकी संस्कृति और मौलिक पहचान के बड़े हिस्से से दूर रख रहे हैं।
थरूर ने इस संवाद के दौरान नेहरूवादी विरासत, ब्रिटिश राज के नकारात्मक परिणामों और भारत के ‘असली इतिहास’ पर भी काफी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि, इस देश का कट्टरपंथी अनुभाग इतिहास की गलत व्याख्या कर प्राचीन भारत की उपलब्धियों को नकारने का प्रयास कर रहा है। थरूर ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से ही भारत अभियांत्रिकी और चिकित्सा के क्षेत्र में काफी आगे रहा है। आयुर्वेद और गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट का योगदान इन क्षेत्रों में भारत की प्राचीन कौशल व निपुणता का ऐसा उदाहरण है जिसके दस्तावेज आज भी सुरक्षित हैं।’

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