Monday, 13 February 2017

भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने यहीं ली थी शरण

कोटेश्वर महादेव मंदिर : भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने यहीं ली थी शरण

रुद्रप्रयाग से लगभग तीन किमी. आगे अलकनंदा के तट पर बना प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर महादेव मं‌दिर अपने आप में आलौकिक है। कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।

इस गुफा वाले मंदिर के आसपास शांतिमय और सम्मोहित कर देने वाला माहौल है। मान्यता है कि कौरवों की मृत्यु के बाद जब पांडव मुक्ति का वरदान मांगने के लिए भगवान शिव को खोज रहे ‌थे तो शिव इसी गुफा में ध्यानावस्था में रहे थे।

एक अन्य पौराणिक मान्‍यता के अनुसार भस्मासुर नामक राक्षस ने तपस्‍या कर शिव से किसी भी व्यक्ति के सिर पर हाथ रखने पर भस्म करने का वरदान मांगा लिया था। वरदान पाने के बाद राक्षस ने भगवान शिव को भस्म करने की सोची। भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे।

सीधी खड़ी बड़ी चट्टानों के बीच से निकलते पेड़ और चट्टानों पर लगी विशेष किस्म की वनस्पतियों के बीच शांत अलकनंदा की सुंदरता देखते ही बनती है। गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियां और शिवलिंग प्राचीन काल से स्थापित हैं।
गुफा के बाहर कल-कल बहती अलकनंदा का विहंगम दृश्य भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को लुभाता है।

No comments:

Post a Comment