Monday, 13 February 2017

माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम

माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम


दुनिया के सभी धर्मों व सम्प्रदायों में माता-पिता का स्थान श्रेष्ठ माना गया है । हिन्दु, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई व पारसी सभी अपने-अपने तरीके से माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं ।
हमारे देश में ऐसे दिव्य संस्कार अभी भी विद्यमान हैं किंतु पश्चिमी देशों में स्थिति चिंताजनक है ।
‘इन्नोसंटी रिपोर्ट कार्ड’ के अनुसार 28 विकसित देशों मे हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं व 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अकेले अमेरिका में हर साल 4 लाख 95 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं । इसका एक प्रमुख कारण है विदेशों में ‘वेलेंटाइन डे’ जैसी परंपरा को बढ़ावा देना । राजनीति शास्त्र के प्रफेशर जॉन जे. डिलुलियो कहते हैं कि ‘‘धार्मिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जाय, जिससे बच्चों व युवाओं के मन में अच्छे संस्कार डाले जायें ।’’
संत श्री आसारामजी बापू युवक-युवतियाँ-बच्चों में अच्छे संस्कार आयें इसके लिए वेलेंटाइन डे मनाने के बदले ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाने का आह्वान किया है ।
माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम
नैतिक मूल्यों के विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों में माता-पिता का पूजन सर्वोत्तम है । अरबों-खरबों डॉलर खर्च करने पर भी विदेशों में नैतिक पतन का स्तर गिरता ही जा रहा है । जबकि माता-पिता का पूजन जैसे उन्नत संस्कारों का ही यह फल है कि 14 देशों के बच्चे व युवाओं में किये सर्वेक्षण में भारतीय सबसे अधिक सुखी और स्नेही पाये गये । लंदन व न्यूयार्क में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक बड़ा कारण है – भारतीय लोंगो का पारिवारिक स्नेह व निष्ठा ।

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