Wednesday, 8 February 2017

शिव को जल चढ़ाया जाता है, क्या आप जानते हैं

इस वजह से शिव को जल चढ़ाया जाता है, क्या आप जानते हैं यह कारण


ऋषिकेश के पंकजा और मधुमती नदियों के संगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है. वैसे तो शिव के मंदिरों में द्वादश ज्योतिर्लिंग की चर्चा की जाती है, लेकिन शिव भक्तों के लिए नीलकंठ महादेव का महत्व कुछ अलग ही है.
नीलकंठ महादेव वह स्थल है, जहां समुद्र मंथन का हलाहल पीने के बाद शिव वर्षों तक आराम करते रहे. बाद में देवताओं के आग्रह पर वे कैलाश पर्वत पर वापस गए. वास्तव में समुद्र मंथन का गरल पीने के बाद शिव का कंठ नीला हो गया था.
कई सालों तक ऋषिकेश की एक चोटी पर आराम करने के बाद शिव अपने गले से विष को दूर कर पाए. विष से शिव का माथा गरम हो चुका था. देवताओं ने शीतलता प्रदान करने के लिए शिव के माथे पर जल अर्पित किया, तभी से उनको जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है.
नीलकंठ महादेव का मंदिर उत्तराखंड के ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (राम झूला या शिवानंद झूला) से 23 किलोमीटर दूर 1,675 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. अगर आप नीलकंठ महादेव जाना चाहते हैं तो ऋषिकेश से वहां जा सकते हैं. जीप या टैक्सी से करीब 45 मिनट का सफर है.
वैसे नीलकंठ जाने का रास्ता स्वर्गाश्रम से पैदल जाने का भी है. यह मार्ग 11 किलोमीटर का है, लेकिन सीधा चढ़ाई वाला है. जो लोग ट्रैकिंग के शौकीन हैं, वे इस मार्ग से भी जा सकते हैं. नीलकंठ में शिव का बड़ा ही मनोरम मंदिर बना है.
मंदिर के बाहर नक्काशियों में समुद्र मंथन की कथा उकेरी गई है. खासतौर पर शिवरात्रि और सावन में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है, लेकिन बाकी के साल यहां दर्शन अपेक्षाकृत आसानी से किए जा सकते हैं. यहां आप चांदी के बने शिवलिंग का काफी निकटता से दर्शन कर सकते हैं.
ऋषिकेश और हरिद्वार आने वाले बहुत कम श्रद्धालु नीलकंठ तक जाते हैं. जो लोग समय की कमी के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ नहीं जा पाते, उन्हें नीलकंठ महादेव जरूर जाना चाहिए.

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