Saturday, 18 February 2017

शिवाजी महाराज का इतिहास

शिवाजी महाराज का इतिहास 



Maratha साम्राज्य के संस्थापक  Chhtrapati Shivaji Maharaj History in Hindi | छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास , Shivaji Maharaj को Shivaji Raje नाम से भी जाना जाता है . Shivaji  की वीरतायों की कहानियो से आज भी भारत का इतिहास भरा हुआ है

शिवाजी महाराज का इतिहास

नाम        –    शिवाजी  भोसले Shivaji Bhosle .
जन्म        –    अप्रैल, १६२७  ( शिवनेरी दुर्ग पुणे )
पिता        –  शहाजी भोसले Shahji Bhosle.
माता        –  जीजाबाई Jijabai
पुत्र          –    संभाजी ( Sambhaji Maharaj ) , राजराम
मराठा  राज्य के प्रथम  शासक थे शिवाजी महाराज ( Shivaji Maharaj ) . शिवाजी का जन्म  शिवनेर के दुर्ग  में हुआ था . शिवाजी के  पिता का नाम शाहजी भोंसले  ( Shahji  Maharaj ) और  शिवाजी की माता का नाम जीजाबाई ( Jijabai )था . शाहजी भसले पहले अहमदनगर के निजाम थे और बाद में बीजापुर के दरबार में नौकरी करने लगे | शिवाजी के पालन पोषण का दायित्व पूरा उनकी माता जीजाबाई पर था | शिवाजी बचपन से ही बहुत साहसी थे | कहा जाता है उनकी माता बहुत धार्मिक प्रवर्ति की थी , जिनका प्रभाव भी शिवाजी पर पढ़ा | माता जीजाबाई बचपन में शिवानी को वीरता की कहानिया  सुनाया करती , जिसका प्रब्भाव शिवाजी पर पढ़ | शिवाजी के गुरु थे स्वामी रामदास जिन्होंने  शिवाजी  की  निर्भीकता  , अन्याय से  जूझने  की  सामर्थ्य  और  संगठनात्मक  योगदान  का  विकास  किया |

ShivajiRaje से Chhatrapati Shivaji Maharaj तक का सफर

शिवाजी राजे ( Shivaji Raje ) के  कुछ बढे  होने पर शाहजी ने शिवाजी को अपनी एक जागीर पुणे दे दी  | शिवाजी बहुत साहसी थे और सोचते थे की वह दूसरे राजायो की सेवा   क्यों  करे . शिबवाजी का सपना था मराठो का अलग  राज्य हो , इसी सपने को लेकर शिवाजी १८ साल की उम्र से ही सेना इकठा करने लगे . धीरे धीरे एक अलग मराठा राज्य बनाने के उद्देश्य से शिवाजी ने आस पास के छोटे छोटे राज्यो पर आक्रमण करना शुरू कर दिया और उन्हें जीत लिया | शिवाजी ने पुणे के आस पास के कई किलो को जीत लिया और नए किलों का निर्माण भी कराया जैसे ‘ रायगढ़ का किला ‘
शिवाजी को स्वत्रंत राज्य की स्थापना करने में दक्षिण में बीजापुर और अहमदाबाद के सुल्तान और Delhiमें मुग़ल बादशाह से संघर्ष करना पढ़ा |
शिवाजी Shivaji Maharaj  को मारने के लिए बीजापुर  के सुल्तान ने अपने प्रमुख सेनापति अफजल को एक विशाल सेना के साथ पुणे की तरफ भेजा | अफजल खान ने शिवाजी को मारने के लिए चालाकी से उन्हें अपने तम्बू में संधि करने बुलाया | शिवाजी अपने कुछ सिपाहियों   के साथ अफजल   से  मिलने  गए | उसने जैसे ही शिवाजी को मारने के लिए कंजर उठाया शिवाजी ने उसे एक ही वार में मर गिराया | उधर दिल्ली में औरंगजेब भी शिवाजी को अपने राज्य के लिए खतरे की तरह देखने लगा | औरंगजेब  ने शिवाजी Shivaji Maharaj को मारने के लिए सूबेदार शाहिस्ता खान को भेजा | शिवाजी ने उसे भी परास्त कर दिया |

उसके बाद औरंगजेब Aurangjeb ने जयसिंह को शिवाजी के पास भेजा | जयसिंह के समझने परMaharaj Shivaji औरंगजेब  से संधि करने औरंगजेब  के दरवार में आ गए |वहां शिवाजी के स्वत्रंत व्यवहार से औरंगजेब  असंतुष्ट हो गया और उसने शिवाजी को कैद कर दिया | Shivaji कुछ समय बाद औरंगजेब  की कैद से योजना बनाकर निकल गए | इसके बाद १६७० में सूरत पर आक्रमण करके उन्होंने बहुत सी संपत्ति इक्कठी कर ली | शिवाजी का रायगढ़ में पंडित गंगाभट्ट द्वारा राज्याभिषेक हुआ और शिवाजी , Chhtrapati Shivaji Maharaj हो गए |  शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के कुछ दिन बाद ही उनकी माता Jijabai का देहांत हो गया | Shivaji का राज्य उत्तर में रामनगर से लेकर दक्षिण में कारवार तक फ़ैल गया | शिवाजी ने अपने गुरु की चरण पादुका रखकर शासन किया और अपने गुरु के नाम पर ही सिक्के बनवाये |  १९८० में शिवाजी महाराज का देहांत हो गया |
शिवाजी की शासन  प्रणाली शिवाजी महाराज  j एक कुशल शासक, योग्य सेनापति  थे , शिवाजी ने अपनी योग्यता के बल पर मराठो को संगठित  करके  अलग मराठा साम्राज्य की स्थापना की .
शिवाजी ने अपनी राज्य व्यवस्था के लिए 8 मंत्री नियुक्त किये | उन्हें अष्ट प्रधान खा जाता था | जिसमे पेशवा का पद सबसे महत्वपूर्ण होता था
साम्राज्य की सुरक्षा के लिए शिवाजी ने एक अनुशासित सेना बनायीं जिन्हें नगद वेतन भी दिया जाता था | अर उन्होंने एक जहाजी बेडा भी बनाया इसलिए  शिवाजी को आधुनिक नौ सेना का जनक भी कहा जाता है | शिवाजी छापामार युद्ध प्रडाली का प्रयोग करते | मराठा राज्य की आय  का मुख्य स्रोत्र था भूमि कर|
मराठा प्रणाली के  अष्ट प्रधान
1. पेशवा (प्रधानमंत्री )
2.अमात्य ( मजूमदार )
3.मंत्री
4.सचिव
5.सुमंत
6.सेनापति
7.पंडित राव
8.न्यायधीश
शिवाजी महाराज  के उत्तारधिकारी
शिवाजी महाराज  के पौत्र शाहू ने एक ब्राह्मण बालाजी विश्वनाथ को अपना पेशवा नियुक्त किया  | बालाजी विश्वनाथ  ही राज्य की सभी व्यव्श्था देखते थे | बालाजी विश्वनाथ ने अपनी योग्यता और कुशलता के बल पर मराठा शासन को मजबूत बनाया . उन्होंने मुग़ल शासक मोह्हमद शाह रंगीला से दक्षिण इलाके से चौथे और सरदेशमुखी कर बसूलना शुरू कर दिया | और उन सब इलाको पर पुनः अधिकार कर लिया जिसे मुगलो ने अपने अधिकार में ले लिया था | सैनिक और आर्थिक दृस्टि से मराठो ने अपनी शक्ति बढ़ा ली अब वह मुग़ल सेना का सामना भली भाटी कर सकते थे | मुगलो के साथ युद्ध करने में मराठो ने छापामार प्रणाली अपनायी .
बालाजी विश्वनाथ  के बाद उनका पुत्र बाजीराव ( Peshwa Bajirao )प्रथम को पेशवा के पद पर नियुक्त किया गया | बाजीराव एक कुशल सेनापति व उच्च कोटि का कूटनीतिज्ञ थे | बाजीराव प्रथम के बाद बाजीराव के पुत्र बाजीराव द्वितीय को पेशवा बनाया गया
बाजीराव द्वितीय  का अफगानिस्तान के शासक अब्दाली से पानीपत में युद्ध हुआ | इस युद्ध में मराठाओ की हर हुई | और मराठा साम्राज्य का पतन हुआ |

शिवाजी महाराज  की  विशेषता 

1. अच्छी संगठन शक्ति  का होना ( Good Organizer )
शिवाजी ने बिक्री हुए मराठाओ को इक्कठा करके उनकी शक्ति को एक जुट कर एक महान मराठा राज्य की स्थापना की
2. वीर सैनिक ( Brave Soldier )
शिवाजी जैसे वीर भारत देश में बहुत कम हुए हैं , आज भी उनकी वीरता की कहानियो लोगो के उत्साह को बढ़ा देती हैं
3. महान मार्गदर्शक (* Good Leader )
शिवाजी ने मुगलो के राज्य में हिन्दू साम्राज्य स्थापित करने वाले एक मात्र राजा थे , उन्होंने केवल मराठाओ को ही नहीं वल्कि सभी भारतवासियो को भी नयी दिशा दिखाई
4.आज्ञाकारी पुत्र और शिष्य ( Obedient Son )
कहा जाता है शिवाजी अपनी माता की हर आज्ञा का पालन करते थे

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