Follow Me On Facebook

Monday, 27 March 2017

भारतीय नववर्ष प्रारंभ, परंपरा में सृष्‍टि का आरंभ दिवस, वैदिक कालगणना में बीते अब तक एक करोड़ वर्ष.

भारतीय नववर्ष प्रारंभ, परंपरा में सृष्‍टि का आरंभ दिवस, वैदिक कालगणना में बीते अब तक एक करोड़ वर्ष.

भारतीय नववर्ष कैसे मनाएँ :

1. हम परस्पर एक दुसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।

2. आपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।

3 . इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फेहराएँ।

4. आपने घरों के द्वार, आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएँ।

5. घरों एवं धार्मिक स्थलों की सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएँ।

6. इस अवसर पर होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लें अथवा कार
इसी तिथि को रेवती नक्षत्र में विष्कुम्भ योग में दिन के समय भगवान के आदि अवतार मत्स्य रूप का प्रादुभाव भी माना जाता है।
 युगों में प्रथम सत्ययुग का प्रारम्भ भी इसी तिथि को हुआ था.
1. इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।
2. सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।
3. प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।
4. शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है। 
5. सिख परंपरा के द्वितीय गुरू श्री अंगद देव जी के जन्म दिवस का यही दिन है।
6. स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना।
7. सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।
8. विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।
9. युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
किसानो के लिए यह नव वर्ष के प्रारम्भ का शुभ दिन माना जाता है। इस तरह हम देखते हैं कि चैत्र प्रतिपदा का यह पहला दिन कई मायनों में महत्‍वपूर्ण है। आप सभी को नववर्ष की शुभ और मंगलकामनाएं।
भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व :

1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।

2. फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

3. नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।

आज से भारतीय नव वर्ष प्रारंभ हो जाएगा। हमने विक्रमी संवत् 2074 को अलविदा कह नये वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। आज से महीने की शुरुआत तो ही रही है, साथ ही नवदुर्गा की भी शुरुआत हो रही है।
भारतीय नववर्ष का पहला दिन यानी सृष्टि का आरम्भ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत् जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, मां दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस, आर्य समाज का स्थापना दिवस, संत झूलेलाल जयंती, आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन के संस्थापक, प्रखर देशभक्त डॉ केशवराव हेडगेवार जी जन्मदिवस।
वास्तव में ये वर्ष का सबसे श्रेष्ठ दिवस है। हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टिनिर्माण प्रारम्भ किया था, इसलिए यह सृष्टि का प्रथम दिन है। इसकी काल गणना बड़ी प्रचीन है। सृष्टि के प्रारम्भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 112 वर्ष बीत चुके हैं।
यह गणना ज्योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्‍पत्‍ति का समय एक अरब वर्ष से अधिक बता रहे है। अपने देश में कई प्रकार की कालगणना की जाती है जैसे- युगाब्द  (कलियुग का प्रारम्भ), श्री कृष्णच संवत्, शक संवत् आदि हैं।
हिन्दु शास्त्रानुसार इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारम्भ गणितीय और खगोलशास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है। प्रतिपदा हमारे लिये क्‍यों महत्वपूर्ण है, इसके सामाजिक एवं ऐतिहासिक सन्दर्भ हैं-

No comments:

Post a Comment