Tuesday, 28 March 2017

इस कारण कम हो रही है अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या

इस कारण कम हो रही है अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या
 जम्मू-कश्मीर में आतंक का डर एवं यात्रा के लिए पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) में आ रही परेशानी के कारण अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से घट रही है। पिछले पांच वर्ष में बाबा बफार्नी के दर्शन को जाने वाले तीर्थयात्री ६५ प्रतिशत तक कम हो गए हैं।
भोपाल में तो पंजीकरण के लिए पिछले वर्ष मिले ९४०० फार्म में से ३४०० फार्म खाली रह जाने के कारण वापस हो गए थे। जिन लोगों ने फार्म भरे भी थे, उनमें से आधे ही यात्रा में शामिल हुए थे। इस संबंध में राजधानी की एक संस्था ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ई-मेल के जरिए संदेश भेज कर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पूरी तरह सेना के हवाले करने की मांग की है। इस बार अमरनाथ यात्रा २९ जून से शुरू होगी, जो 7 अगस्त तक चलेगी।
ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के सचिव रिंकू भटेजा ने बताया कि, आतंकी खतरा, पत्थरबाजी के अलावा श्रद्धालुओं के पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया के कारण अमरनाथ जाने वालों की संख्या में कमी आ रही है। वर्ष-२०१२ में जहां देश भर से ६ लाख २१ हजार श्रद्धालुओं ने बाबा बफार्नी के दर्शन किए थे, वहीं वर्ष-२०१६ में श्रद्धालुओं की संख्या घटकर २ लाख २० हजार रह गई। पिछले वर्ष आतंकी बुरहानबानी के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों ने जमकर उपद्रव किया था। इससे श्रद्धालुओं को काफी मुसीबत का सामना भी करना पड़ा था।

ऑनलाइन हो रजिस्ट्रेशन

रिंकू भटेजा ने बताया कि, वर्ष-२०१२ के पहले इस यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण हुआ करते थे, परंतु बाद में यह सुविधा बंद कर दी गई। इसके बाद देश की ४३३ बैंक शाखाओं को इसके लिए अधिकृत किया गया जिसमें जम्मू-कश्मीर बैंक एवं पंजाब नेशनल बैंक ही शामिल किए गए। मध्यप्रदेश में २६ बैंक शाखाओं में पंजीकरण जारी हैं। इनमें भोपाल की न्यूमार्केट स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक एवं पंजाब नेशनल बैंक शामिल हैं।
हाल ही में रिंकू भटेजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमरनाथ यात्रा का पंजीकरण फिर से ऑनलाइन शुरू करने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा सेना के हवाले करने के लिए ई-मेल द्वारा आग्रह किया है।

फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने में होती है परेशानी

अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए फिजिकल फिटनेस का सर्टिफिकेट आवश्यक होता है जो कि, केवल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के स्वास्थ्य अधिकारी ही जारी कर सकते हैं। परंतु इसके लिए अस्पतालों में अलग से काउंटर नहीं होने से लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है। कभी-कभी सर्टिफिकेट के लिए ३-४ दिन तक चक्कर लगाना पड़ता है जिससे परेशान होकर कई लोग यात्रा स्थगित कर देते हैं।

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