Monday, 27 March 2017

मुंबई में ढाई एकड़ में बने 2,603 करोड़ रुपये के जिन्ना हाउस को ढहा दिया जाना चाहिए

नेहरु के कारण जिन्ना का बंगला अभी भी है भारत में . भाजपा विधायक ने कहा इसे फ़ौरन ध्वस्त किया जाय.

मुंबई में ढाई एकड़ में बने 2,603 करोड़ रुपये के जिन्ना हाउस

मुंबई के शीर्ष बिल्डरों में से एक तथा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक ने सरकार से कहा है कि पाकिस्तान के संस्थापक और 'कायदा-ए-आज़म' कहे जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा बनवाया गया मुंबई स्थित आलीशान घर ढहा दिया जाना चाहिए.
देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई शहर की एक बड़ी रीयल एस्टेट डेवलपर कंपनी के प्रवर्तक (प्रमोटर) व विधायक मंगल प्रभात लोढा ने विधानसभा में कहा कि दक्षिणी मुंबई स्थित जिन्ना हाउस को ढहा दिया जाना चाहिए, और उसके स्थान पर कल्चरल सेंटर बनाया जाना चाहिए. गौरतलब है कि जिन्ना हाउस ढाई एकड़ ज़मीन पर बना हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,603 करोड़ रुपये) है.दक्षिणी मुंबई में जिन्ना का आवास वह जगह है, जहां विभाजन (देश का बंटवारा) का षडयंत्र रचा गया था... जिन्ना हाउस विभाजन का प्रतीक है... इस ढांचे को गिरा दिया जाना चाहिए..." उन्होंने तर्क दिया कि यूरोपीय स्टाइल में समुद्रतट के सामने 1930 के दशक के अंतिम वर्षों में बने इस बंगले के रखरखाव में लाखों रुपये बर्बाद करने पड़ रहे हैं.अखरोट की लकड़ी की पैनलिंग के साथ इटैलियन संगमरमर के इस्तेमाल से बने शानदार खूबसूरत खंभों वाला जिन्ना हाउस कई दशक तक ब्रिटेन के डिप्टी हाईकमिश्नर का आवास भी रहा, लेकिन वर्ष 1982 में खाली होने के बाद से इस्तेमाल में लगभग नहीं है.यही वह ऐतिहासिक मकान है, जहां बंटवारे को लेकर भारतीय नेताओं के साथ जिन्ना की बैठकें हुआ करती थीं. पाकिस्तान ने भी बार-बार भारत से आग्रह किया है कि वह इस घर को उनकी सरकार को बेच दे, या किराये (लीज़) पर दे दे, ताकि वे यहां कॉन्स्यूलर कार्यालय बना सकें, लेकिन भारत ने इस अनुरोध को न कबूल किया है, और न कभी खारिज किया. इस मकान पर अब ताला लगा हुआ है, और यह ढह जाने की कगार पर है. वर्ष 2007 में मोहम्मद अली जिन्ना की पुत्री दिना वाडिया, जो उस वक्त 88 वर्ष की थीं, और अमेरिका के न्यूयार्क में रहा करती थीं, ने मुंबई हाईकोर्ट की शरण ली थी, ताकि संपत्ति का मालिकाना हक हासिल कर सकें. दिना के पुत्र नुस्ली मुंबई में ही रहते हैं, और टेक्सटाइल तथा रीयल एस्टेट का काफी बड़ा कारोबार चलाते हैं.विभाजन के बाद भारत ने ऐसी सभी चल तथा अचल संपत्ति को जब्त कर लिया था, जो उन लोगों द्वारा छोड़ी गई थी, जिन्होंने पाकिस्तान जाने का निर्णय किया था, और इस तरह की संपत्ति को 'विस्थापितों की संपत्ति' करार दिया गया था. लेकिन सद्भावना के तहत उठाए गए कदम के तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह सुनिश्चित करवाया कि मोहम्मद अली जिन्ना या उनकी पुत्री को विस्थापित न लिखा जाए, और न ही उनकी संपत्ति को 'विस्थापितों की संपत्ति' के रूप में दर्ज किया जाए.

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