Tuesday, 21 March 2017

68 साल से लटका हुआ है राम मंदिर मामला, जानें क्या है विवाद?

68 साल से लटका हुआ है राम मंदिर मामला, जानें क्या है विवाद?

सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले पर अहम टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा कि दोनों पक्ष आपस में मिलकर इस मामले को सुलझाएं. अगर जरूरत पड़ती है तो सुप्रीम कोर्ट के जज मध्यस्थता को तैयार हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर का मामला धर्म और आस्था से जुड़ा है. जानें- क्या है राम मंदिर मामला और क्यों हैं इस पर विवाद.
1528: दावा किया जाता है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ.
1949: बाबरी मस्जिद में गुप्त रूप से भगवान राम की मूर्ति रख दी गई. दावा किया गया कि भगवान राम का यही जन्म हुआ था. इसके बाद ये दावे सामने आए कि मंदिर हटाकर बाबरी मस्जिद बनवाई गई थी.
1984: मंदिर निर्माण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया.
1986: इस विवादित स्थल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया. इसी साल 1986 में ही बाबरी मस्जिद कमेटी का गठन किया गया. 
1990: लाल कृष्ण आडवाणी ने देशव्यापी रथयात्रा की शुरुआत की. साल 1991 में रथयात्रा का पायदा बीजेपी को हुआ और वो यूपी की सत्ता में आ गई. मंदिर बनाने के लिए देशभर से ईंटें भेजी गईं.
1992: 6 दिसंबर के दिन हजारों की संख्या में सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए.
1992: न्यायूमूर्ति लिब्रहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया. 1993: इस आयोग ने जांच शुरू की.
2002: विवादित स्थल पर सैकड़ों श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हुआ. हाईकोर्ट के एएसआई को इस बात की जांच करने के लिए कहा गया कि 1528 में पहले वहां मस्जिद थी या नहीं.
2003: एएसआई ने कहा कि मंदिर अवशेष के सबूत हैं.
2009: लिब्रहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी.
2010: हाईकोर्ट ने इन विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया.
2011: सुप्रीम कोर्ट नें हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया.

अयोध्या मामले का आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहींः जफरयाब जिलानी

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा समेत सभी भगवा दल और कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने स्वागत किया है, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य, ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और बाबरी मस्जिद के लिए केस लड़ रहे वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें कोई आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहीं है. पात्रा ने कहा कि पार्टी इस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक अध्ययन करेगी और संबंधित पक्ष इसको मिलकर सुलझाएंगे.
मामले में RSS विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर पहले से ही था. लिहाजा वहां राम मंदिर का ही निर्माण होना चाहिए. मस्जिद का निर्माण नहीं होना चाहिए. इस मसले को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए. मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से ही इस पर बातचीत का आधार बनता है. अब इसका समाधान ढूढ़ने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए. सिन्हा ने कहा कि बाबरी मस्जिद कमेटी इस बात के कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे पाई कि वहां पर मस्जिद था. ऐसे में वहां पर राम मंदिर का निर्माण करने में कोई दिक्कतनहीं होनी चाहिए. 
बीजेपी समझौते को पूरी तरह तैयार 
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि हम राम मंदिर मामले में समझौते को तैयार हैं. वहां पर राम मंदिर पहले से था. ऐसे में राम मंदिर वहीं बनना चाहिए. मस्जिद कहीं पर भी बनाई जा सकती है. सरयू नदी के पार मुसलमान मस्जिद बना सकते हैं. मुसलमान सड़क पर भी नमाज पढ़ सकते हैं. सऊदी समेत कई देशों में बिल्डिंग बनाने के लिए मस्जिद हटाए जाते हैं. मुसलमान कहीं पर भी नमाज पढ़ सकते हैं. लिहाजा मुस्लिम समुदाय इस रचनात्मक सुझाव को माने, तो अच्छा होगा. उन्होंने मामले में मध्यस्था के लिए एक न्यायाधीश की नियुक्त करने की भी मांग की.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा स्वीकार
मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जव्वाद ने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला होगा, उसको मानेंगे. इससे पहले भी कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की कोशिश हुई, लेकिन कोई कोई कामयाबी नहीं मिली. इस संबंध में कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला होगा, वह सभी को मान्य होगा.
कोर्ट के  बाहर समझौते को लेकर मुस्लिम नेता बंटे
जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि बाबरी मस्जिद के मसले पर दोनों पक्षों को बैठकर हल निकालना चाहिए. फिलहाल शाही इमाम देश से बाहर हैं. दिल्ली आकर वह इस मसले पर बात करेंगे. जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें कोई आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहीं है. अगर सुप्रीम कोर्ट कोई मध्यस्थता कर इसका कोई हल निकलता है, तो हम इसके लिए तैयार है. सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता की सूरत में यह पूरी तरह कानूनी होगा और कोई आउट ऑफ कोर्ट नहीं होगा. इससे पहले भी आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट की कई कोशिशें हो चुकी है, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला. ऐसे में प्राइवेट पार्टी के साथ अदालत के बाहर बैठकर कोई हल नहीं निकल सकता.
राम मंदिर निर्माण में आने वाली अड़चने होंगी दूरः महेश शर्मा
केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि हम हमेशा से चाहते थे कि राम मंदिर मुद्दे का हल हो या तो संवैधानिक तरीके से या आपसी बातचीत के जरिए. पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपसी बातचीत से इस मुद्दे का हल निकाले. केंद्र और राज्य में हमारी सरकारें हैं. लिहाजा मंदिर बनाने में आने वाली अड़चनों को दूर कर लिया जाएगा. अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा. बीजेपी के युवा सांसद योगी हमारे मुख्यमंत्री बने हैं. उनके कुशल प्रशासन को देखते हुए हमारी और उम्मीदें बनी है.
ओवैसी ने अवमानना फैसले पर जताई उम्मीद
मामसे में फैसला आने के बाद एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया,"मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट अवमानना याचिका पर भी फैसला सुनाएगा, जो 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के समय से लंबित है." इसके अलावा कई अन्य मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि वे मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे.
इसके अतिरिक्त कानून राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को सही बताया है. उन्होंने कहा कि हम कल से ही मध्यस्थता शुरू करने को तैयार हैं. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जहां तक यूपी में बीजेपी की सरकार बनने का सवाल है, तो लोगों ने विकास के लिए वोट दिया है. बीजेपी सांसद विनय कटियार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की है. इसके अलावा साधु-संतों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने से राम मंदिर निर्माण में तेजी आएगी.
शिवसेना ने 2019 तक मसले को सुलझाने को कहा
शिवसेना ने मामले में सुप्रीम कोर्ट और बीजेपी की आलोचना की है. शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा कि यूपी में सिर्फ एक पक्ष राम मंदिर पार्टी यानी बीजेपी है. केंद्र और यूपी में बीजेपी की बहुमत की सरकारें हैं. लिहाजा बीजेपी राम मंदिर विवाद को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सुलझा ले. वहीं, राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का स्वागत करते हुए उमा भारती ने उम्मीद जताई कि मामले को अदालत के बाहर सुलझा लिया जाएगा.
सड़क पर भी पढ़ सकते हैं नमाजस्वामी ने बताया कि कोर्ट में उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राम जहां पैदा हुए मंदिर वहीं बन सकता है. मस्जिद कहीं भी बन सकता है. नमाज सड़क पर भी पढ़ा जाता है. हमें उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय इस सकारात्मक प्रस्ताव पर विचार करेगा. 
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अदालत ने अयोध्या मामले पर आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट की बात क्यों कही. इसपर विशेषज्ञ मानते हैं कि ये धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है इसलिए कोर्ट फैसले से पहले आपसी सहमति की कोशिश चाहता है. अदालत का फैसला जमीन के मालिकाना हक को लेकर हो सकता है लेकिन ये आस्था का विषय है. संघ से जुड़े राकेश सिन्हा ने कहा कि ये मामला आस्था का है और सहमति से इसपर फैसला होना चाहिए.
अदालत का फैसला मंजूर: कल्बे जवाद
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जवाद ने कहा कि जो अदालत का फैसला होगा वो हमें मंजूर होगा.
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अच्छी पहल की है. ये चर्चा सौहार्दपूर्ण तरीके से हो बीजेपी इसका स्वागत करती है.
योगी ने किया स्वागत
अयोध्या मामले पर याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने जानकारी दी कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की जानकारी दी तो उन्होंने इसका स्वागत किया.

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