Tuesday, 21 March 2017

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सम्राट अशोक नाम आता है अखंड भारत के शुरुवात सम्राट अशोक से शुरू हुवा था 

अशोक के बारे में तथ्य और सूचनाएं


जन्म304 ईसा पूर्व (7 अगस्त के आसपास)
शासनकाल268-232 ईसा पूर्व
पिताबिंदुसार
मातामहारानी धर्मा या शुभद्रांगी
बच्चेमहिंदा, संघमित्रा, कुणाल, चारुमति, जालुक, तिवाला
धार्मिक मान्यताबौद्ध
जन्मपाटलिपुत्र, पटना
राज्याभिषेक268 ईसा पूर्व
निधन232 ईसा पूर्व (उम्र 72 वर्ष)
मृत्यु का स्थानपाटलिपुत्र, पटना
अंतिम संस्कारउनका अंतिम संस्कार 232 ईसा पूर्व में उनके निधन के 24 घंटे के भीतर हुआ था। बाद में उनकी राख को गंगा नदी में विसर्जित कर दिया गया था।
पूर्वजबिंदुसार
अग्रजदशरथ
पत्नियांमहारानी देवी, रानी पद्मावती, तिश्यारक्षा, करुवकी, पद्मावती
वंशमौर्य
उनके बारे मेंअशोक भारत के महान शासकों में से एक है, जिन्होंने भारत के कई इलाकों पर शासन किया।
शासक के तौर पर शुरुआती जीवनअशोक बहुत ही गुस्सैल स्वभाव के थे। उदाहरण के लिए 500 मंत्रियों की मौत तो विश्वासपरस्ती की परीक्षा के दौरान ही हो गई, जो सम्राट अशोक ने ली थी। उनके हरम में 500 महिलाएं थी।
कलिंग युद्धएक लाख ज्यादा सैनिक और कई आम नागरिक कलिंग युद्ध के दौरान मारे गए थे और 1,50,000 से ज्यादा घायल हुए थे। लाखों लोग बेघर हो गए थे।
बौद्ध धर्म में परिवर्तनयुद्धभूमि में बिछी लाशें और उनके परिजनों का विलाप सुनकर सम्राट अशोक के स्वभाव में बदलाव आया। उनका व्यक्तित्व एक शांतिप्रिय और धर्मनिष्ठ राजा के तौर पर विकसित हुआ। इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया, जिसने भारत और दुनियाभर में इस धर्म के प्रचार-प्रसार में प्रमुख भूमिका निभाई।
इस काम में अशोक की मदद उनके बच्चों ने की। उनके बेटे महिंदा और बेटी संघमित्रा ने सिलोन में जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया, जिसे आज श्री लंका के तौर पर जाना जाता है।
इन निर्माणों का श्रेय अशोक को जाता हैसांची, मध्य प्रदेश
धमक स्तूप, सारनाथ, उत्तर प्रदेश
महाबोधि मंदिर, बिहार 
बाराबार गुफाएं, बिहार
नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार
तक्षशिला विश्वविद्यालय, तक्षशिला, पाकिस्तान
भीर माउंड, तक्षशिला, पाकिस्तान
भारहत स्तूप, मध्य प्रदेश
देवकोथार स्तूप, मध्य प्रदेश
बुत्कारा स्तूप, स्वात, पाकिस्तान
सन्नति स्तूप, कर्नाटक
मीर रुकुन स्तूप नवाबशाह, पाकिस्तान
कला, फिल्म और साहित्यअशोक की चिंता एक कविता है, जिसे कवि जयशंकर प्रसाद ने कलिंग में तबाही के बाद सम्राट अशोक की भावनाओं को प्रस्तुत किया है।
उत्तर-प्रियदर्शी एक काव्य नाटिका है, जो उनके विमोचन पर आधारित है। 1996 में इस नाटिका का मंचन रतन थियाम ने किया था।
पियर्स एंथोनी के स्पेस ओपेरा नॉवेल्स में अशोक का चरित्र चित्रण एक बेहतरीन प्रशासक के तौर पर किया गया है।
2001 में संतोष सिवान ने अशोक नाम से ऐतिहासिक फिल्म बनाई थी, जिसमें शाहरुख खान ने सम्राट अशोक और करीना कपूर ने कलिंग की राजकुमारी की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म पूरी तरह से अशोक के जीवन पर बनी एक काल्पनिक कथा थी।
1973 में, अमर चित्र कथा ने सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित एक ग्राफिक नॉवेल प्रकाशित किया था।
2002 में, “एम्परर अशोक” नाम से एक गाना रिलीज हुआ था, जिसे मैसन जेनिंग्स ने तैयार किया था। इसमें अशोक के जीवन का चरित्र-चित्रण था।
अशोक की सिंह राजधानीअशोक की सिंह मुद्रा वाला एक स्तंभ एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्मारक है। इसे अशोक स्तंभ कहा जाता है, इस पर चार सिंह बने हुए हैं। एक तरफ से सिर्फ तीन सिंह ही दिखते हैं और यह हमारे देश की राष्ट्रीय मुहर है।
चार सिंह वाला यह स्तंभ उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अशोक स्तंभ के ऊपर बना हुआ है।
अशोक स्तंभअशोक स्तंभ को सम्राट अशोक ने ईसा-पूर्व तीसरी शताब्दी में खड़ा किया था।
अशोक चक्रअशोक चक्र को धर्म चक्र माना जाता है जो कि समय चक्र भी कहलाता है। यह तीलियां बौद्ध धर्म की 12 सीख और 12 मूल्यों के बारे में बात करती हैं।




आदर्शवादी तथा बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न, मानव सभ्यता का अग्रदूत तथा प्राचीन भारतीय इतिहास का दैदिप्त्यमान सिताराअशोक एक महान सम्राट था। सभी इतिहासकारों की दृष्टी से अशोक का शासनकाल स्वर्णिम काल कहलाता है।
अशोक बिंदुसार का पुत्र था , बौद्ध ग्रन्थ दीपवंश में बिन्दुसार की 16 पत्नियों एवं 101 पुत्रों का जिक्र है। अशोक की माता का नाम शुभदाग्री था। बिंदुसार ने अपने सभी पुत्रों को बेहतरीन शिक्षा देने की व्यवस्था की थी। लेकिन उन सबमें अशोक सबसे श्रेष्ठ और बुद्धिमान था। प्रशासनिक शिक्षा के लिये बिंदुसार ने अशोक को उज्जैन का सुबेदार नियुक्त किया था। अशोक बचपन से अत्यन्त मेघावी था। अशोक की गणना विश्व के महानतम् शासकों में की जाती है।
सुशीम बिंदुसार का सबसे बड़ा पुत्र था लेकिन बिंदुसार के शासनकाल में ही तक्षशीला में हुए विद्रोह को दबाने में वह अक्षम रहा। बिंदुसार ने अशोक को तक्षशीला भेजा। अशोक वहाँ शांति स्थापित करने में सफल रहा। अशोक अपने पिता के शासनकाल में ही प्रशासनिक कार्यों में सफल हो गया था। जब 273 ई.पू. में बिंदुसार बीमार हुआ तब अशोक उज्जैन का सुबेदार था। पिता की बिमारी की खब़र सुनते ही वह पाटलीपुत्र के लिये रवाना हुआ लेकिन रास्ते में ही अशोक को पिता बिंदुसार के मृत्यु की ख़बर मिली। पाटलीपुत्र पहुँचकर उसे उन लोगों का सामना करना पड़ा जो उसे पसंद नही करते थे। युवराज न होने के कारण अशोक उत्तराधिकार से भी बहुत दूर था। लेकिन अशोक की योग्यता इस बात का संकेत करती थी कि अशोक ही बेहतर उत्तराधिकारी था। बहुत से लोग अशोक के पक्ष में भी थे। अतः उनकी मदद से एंव चार साल के कड़े संघर्ष के बाद 269 ई.पू. में अशोक का औपचारिक रूप से राज्यभिषेक हुआ।
अशोक ने प्रशाश्कीय क्षेत्र में जिस त्याग, दानशीलता तथा उदारता का परिचय दिया एवं मानव को नैतिक स्तर उठाने की प्रेरणा दी वो विश्व इतिहास में कहीं और देखने को नही मिलती है। अशोक ने शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिये अनेक सुधार किये और अनेक धर्म-महापात्रों की नियुक्ति की। अशोक अपनी जनता को अपनी संतान की तरह मानता था। उसने जनहित के लिये प्रांतीय राजुकों को नियुक्त किया। अशोक के छठे लेख से ये स्पष्ट हो जाता है कि वो कुशल प्रशासक था। उसका संदेश था

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