Monday, 27 March 2017

केजरीवाल के नाजायज रिश्तों का ‘आंखों देखा हाल

केजरीवाल के नाजायज रिश्तों का ‘आंखों देखा हाल

पूरी दुनिया को बेइमान और खुद को सबसेईमानदार बताने वाले अरविंद केजरीवाल के चरित्र का सबसे काला पहलू उजागर हुआ है। कभी अरविंद के बेहद करीबी रहे पत्रकार कपिल बजाज ने कुछ ऐसे दावे किए हैं, जिनसे केजरीवाल को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। कपिल ने एक ब्लॉग लिखकर बताया है कि शुरुआती दिनों से ही केजरीवाल के एक नौजवान लड़की से अवैध रिश्ते थे। जब वो मुख्यमंत्री बने तो इस लड़की को उन्होंने एक संवैधानिक संस्था के प्रमुख का पद दे दिया। कपिल बजाज ने अपनी पोस्ट में इस लड़की का नाम उजागर नहीं किया है। उसके असली नाम के बजाय उन्होंने ‘शिल्पा’ नाम का इस्तेमाल किया है। कपिल बजाज ने यह ब्लॉग 5 अक्टूबर को लिखा था, इसके बाद उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों को ईमेल के जरिए इसे भेजा, लेकिन शायद दिल्ली सरकार के विज्ञापनों के दबाव में सभी ने इस खबर पर चुप्पी साधे रखी।

जूनियर से केजरीवाल के अवैध संबंध!

अपनी पोस्ट में कपिल बजाज ने बताया है कि बिजनेस टुडे में नौकरी छोड़कर उन्होंने अरविंदकेजरीवाल का एनजीओ ज्वाइन किया था। ये शुरुआती दिन थे, जब उनके साथ मनीष सिसोदिया और 3-4 और लोग काम करते थे। उन्हीं में से एक शिल्पा (बदला हुआ नाम) भी थी। उसकी उम्र 20 साल के आसपास रही होगी। उसकी उम्र काफी कम थी, लेकिन केजरीवाल के साथ उसके संबंध बेहद हल्के-फुल्के थे। वो उनको प्यार से ‘आलू’ बोला करती थी। शिल्पा अक्सर दिल्ली से बाहर के शहरों में होने वाली मीटिंग्स में अरविंद के साथ जाया करती थी। कपिल बजाज ने 18 नवंबर 2008 की एक घटना का जिक्र किया है। तब वो केजरीवाल और शिल्पा केरल की लेफ्ट सरकार के एक प्रोजेक्ट पर तिरुवनंतपुरम गए थे। वहां पर तीनों सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरे। लेकिन यहां पर जो कुछ हुआ उसे देखकर केजरीवाल के बारे में कपिल की राय बदल गई। कपिल ने लिखा है कि “जिस व्यक्ति को सामाजिक कार्यों के लिए मैगसेसे अवॉर्ड मिला हो और जो जीवन में ऊंचे आदर्शों की बातें करता हो, उसे अपनी पत्नी को छोड़ अपनी जूनियर सहयोगी के साथ चोरी-छिपे हमबिस्तर होते देखकर मैं सन्न रह गया।” यह वो वक्त था जब जनलोकपाल आंदोलन की तैयारी चल रही थी।

‘केजरीवाल चेहरा बदलने में माहिर’

कपिल ने तिरुवनंत उस घटना के बारे में काफी विस्तार से बताया है। वो लिखते हैं कि “केजरीवाल ने मुझे कुछ काम बताकर ट्रांसलेटर के पास जाने को बोला। मैं वो काम लेकर चला गया। काम जल्दी हो गया और मैं वापस गेस्ट हाउस लौट आया। मैं सीधे उनके कमरे में पहुंचा ताकि बता सकूं कि क्या हुआ। दरवाजा अंदर से बंद था। मुझे कुछ शक हुआ तो मैंने दरवाजे को खटखटाया। काफी देर तक अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। फिर मैंने दरवाजे की पतली दरार से अंदर झांक कर देखा। अंदर शिल्पा और अरविंद बिना कपड़ों में हड़बड़ी में बिस्तर से उतर रहे थे। केजरीवाल ने शिल्पा को बायीं तरफ बनी एक आलमारी में छिपने का इशारा किया। थोड़ी देर बाद जब दरवाजा खुला तो वो कपड़े पहन चुके थे। बाहर आकर उन्होंने ऐसे दिखाया मानो वो सो रहे थे। यह सब देखकर मेरा कलेजा जोर से धड़कने लगा था। मुझे लगा कि ये मेरी गलती है और मैं दो लोगों की प्राइवेसी में दखलंदाजी कर रहा हूं। मैंने किसी तरह अपनी भावनाओं को काबू किया और उन्हें ट्रांसलेटर से हुई बातचीत की जानकारी दे दी। इस दौरान मुझे यह देखकर हैरत हुई कि केजरी वाल इतना सधा हुआ नाटक कर रहे थे कि कोई यकीन ही नहीं कर पाएगा कि दरअसल वो क्या कर रहे थे और उसी कमरे में एक लड़की छिपी हुई है।” इसके बाद सहज दिखने का नाटक करते हुए उन्होंने पूछा- “शिल्पा कहां है?” इस पर कपिल यह कहते हुए बाहर चले गए कि मैं नहीं जानता।
कपिल बजाज के ब्लॉग को पूरे विस्तार से इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है

केजरीवाल को अमेरिकी फंडिंग का जिक्र

कपिल बजाज ने अपने ब्लॉग में कुछ अमेरिकी एजेंसियों से केजरीवाल के एनजीओ को फंडिंग का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया है कि कैसे केजरीवाल शिल्पा पर खुलकर पैसे उड़ाया करते थे। कपिल बजाज ने एक जगह लिखा है कि केजरीवाल ने ‘गलत हरकत’ करने पर मंत्री संदीप कुमार को निकाल दिया था। जबकि वो खुद भी वैसी ‘गलत हरकतें’ करते रहते हैं।
कपिल बजाज का कहना है कि “पहले मैं भी उनको ईमानदार और साहसी माना करता था, लेकिन केरल यात्रा में जो कुछ हुआ उसने उनकी छवि को बदलकर रख दिया था।” दिसंबर 2009 तक उन्होंने केजरीवाल के साथ काम किया और उसके बाद वो मीडिया में वापस लौट गए। अप्रैल 2011 में अन्ना आंदोलन शुरू होने पर फिर से इन लोगों के साथ जुड़े, लेकिन केजरीवाल के पार्टी बनाने के साथ ही फिर से अलग हो गए।

अरविंद केजरीवाल के चरित्र पर पहले से सवाल!

इससे पहले दिल्ली से आम आदमी पार्टी के विधायक और केजरीवाल के करीबी रहे देवेंद्र सहरावत भी केजरीवाल के चरित्र पर सवाल उठा चुके हैं। सेहरावत ने कुछ दिन पहले ट्वीट करके एक महिला का जिक्र किया था। उन्होंने यहां तक बताया था कि केजरीवाल बेहद रंगीनमिजाज किस्म के आदमी हैं। बाहर से चेहरा ऐसा रखते हैं जिससे किसी को शक न हो, लेकिन अंदर-अंदर उनकी कहानियां तमाम सहयोगियों को पता हैं। केजरीवाल की शुरुआती सहयोगी संतोष कोली से भी केजरीवाल के करीबी रिश्तों की बातें कही जाती रही हैं। संतोष कोली की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। खुद संतोष की मां ने तब आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को केजरीवाल ने मरवाया है।
ये तमाम दावे और आरोप इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आखिर केजरीवाल फरियाद लेकर आने वाली महिलाओं को कॉम्प्रोमाइज करने की सलाह देते रहते हैं। वैसे भी किसी व्यक्ति की पहचान उसकी संगत से होती है। यह महज इत्तेफाक नहीं कि केजरीवाल के सबसे करीबी ज्यादातर लोग चरित्र के मामले में हमेशा शक की नज़र से देखे जाते हैं।

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