Friday, 31 March 2017

न्यूज चैनल ने किया पत्थरबाजों का स्टिंग, पत्थरबाज ने कबूला- 2008 से कर रहा हूं ये काम, एक दिन के 5000 तक मिल जाते हैं

एक निजी टीवी चैनल ने खुफिया स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय नौजवानों को पत्थरबाजी करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। इन पत्थरबाजों ने खुफिया कैमरों के सामने स्वीकार किया कि वो नियमित तौर पर पत्थरबाजी करते रहे हैं। एक पत्थरबाज कैमरे के सामने कह रहा था कि वो साल 2008 से ही पत्थरबाज कर रहा है। पत्थरबाज फारूख अहमद लोन ने बताया कि उसे इस काम के लिए 500 से पांच हजार रुपये तक मिलते हैं। पत्थरबाज ने कबूल किया कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन के उग्रवादी बुरहान वानी की मौत के बाद हुए हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी उसने पत्थरबाजी की थी।
जाकिर हमद भट नामक एक अन्य पत्थरबाज ने भी टीवी चैनल आज  तक के खुफिया कैमरे के सामने कबूल किया कि उन्हें पुलिस और भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने के लिए पैसे, जूते और कपड़े भी दिए जाते हैं। फारूख ने बताया कि उसे उसका एक दोस्त आसिफ पैसा देता था लेकिन उसे ये पता नहीं था कि उसके दोस्त को किससे पैसा मिलता था। फारूख ने बताया कि उसके द्वारा फेंके गए पत्थरों से जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान और भारतीय सुरक्षा बल घायल हो चुके हैं।
फारूख ने बताया कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करने और पत्थरबाजी के आदेश मिलते हैं। पकड़े जाने पर वो पुलिस के सामने पैसे मिलने की बात कबूल नहीं करते। पत्थरबाज पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए घर से फरार हो जाते हैं। बुधवार (29 मार्च) को ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि राज्य में होने वाले पत्थरबाजी को पाकिस्तान स्थित व्हाट्सऐप ग्रुप से इसके निर्देश मिलते हैं। पुलिस के अनुसार पत्थरबाजों को व्हाट्सऐप से भारतीय सुरक्षा बलों की स्थिति बतायी जाती है।
कश्‍मीर पुलिस के एक अधिकारी ने सीएनएन-न्‍यूज 18 को बताया कि जब सुरक्षा बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू होती है तो पाकिस्तानी ग्रुप नौजवानों को वहां जाने के लिए कहा जाता है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद्य ने चैनल से कहा कि यह एक तथ्‍य है कि सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल देश के दुश्‍मनों द्वारा किया जा रहा है।  मंगलवार (28 मार्च) को कश्मीर के बडगाम में एक मुठभेड़ के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्‍थरबाजी की गई। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीन नागरिक मारे गए। कश्‍मीरी युवकों और सुरक्षा बलों के बीच इस मुठभेड़ में सीआरपीफ के 63 जवान घायल हुए।

हाट्सएप पर कश्‍मीरी युवकों को पाकिस्‍तान से भेजी जाती है एनकाउंटर की लोकेशन, फिर कराते हैं पत्‍थरबाजी

जम्‍मू-कश्‍मीर में सुरक्षा बलों पर स्‍थानीय नागरिकों द्वारा की जाने वाली पत्‍थरबाजी के पीछे पुलिस ने पाकिस्‍तान का हाथ होने का शक जताया है। हाल ही में श्रीनगर में दर्ज किए गए एक मामले में जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने आरोप लगाया है कि पत्‍थरबाजी के लिए कई व्‍हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिनके एडमिन पाकिस्‍तानी हैं। इन ग्रुन में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे एनकाउंटर की सटीक लोकेशन और समय भेजा जाता है, फिर युवाओं से वहां पहुंचने को कहा जाता है। कश्‍मीर पुलिस के एक अधिकारी ने सीएनएन-न्‍यूज 18 को बताया कि ”जैसे ही एनकांउटर शुरू होता है, पाकिस्‍तान के आतंकी संगठनों के लोग लोकेशन के बारे में सटीक जानकारी भेजकर युवाओं को एक जगह इकट्ठा होने को कहते हैं।” पुलिस ने दावा किया है कि इन व्‍हाट्सएप ग्रुप्‍स में एक एरिया के युवाओं को अगले एरिया के युवाओं से जोड़ने के लिए लिंक भी डाले जाते हैं। डीजीपी एसपी वैद्य ने कहा, ”यह एक तथ्‍य है कि सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल देश के दुश्‍मनों द्वारा किया जा रहा है।”
कश्‍मीर के बडगाम में, मंगलवार (28 मार्च) को एक घर में छिपे आतंकी को पकड़ने की मुहिम में जुटे सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों पर पत्‍थरबाजी की गई, जिसमें तीन नागरिक मारे गए। कश्‍मीरी युवकों और सुरक्षा बलों के बीच इस मुठभेड़ में सीआरपीफ के 63 जवान घायल हुए। पिछले दिनों, जम्‍मू-कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी के युवाओं से पत्‍थरबाजी न करने की अपील की थी। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने सख्‍त लहजे में पत्‍थरबाजों को चेतावनी देते हुए कहा था कि सेना की कार्रवाई में बाधा डालने वालों से कड़ाई से निपटा जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि आतंकियों की मदद करने वालों को भी आतंकी ही समझा जाएगा।
दूसरी तरफ, पत्‍थरबाजों से निपटने के लिए केंद्र सरकार पेलेट गन के इस्‍तेमाल को पूरी तरह खत्‍म करने पर तैयार नहीं है। मंगलवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने लोक सभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने तय किया है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल PAVA- चिली (शेल और ग्रिनेड्स), स्टन लैक (शेल और ग्रिनेड्स) का इस्तेमाल करते रहेंगे। साथ ही अगर यह हथियार कारगर साबित नहीं हुए तो पेलेट गन्स का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

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