Wednesday, 29 March 2017

इंदिरा गांधी की वजह से आज रिक्शा चला रहा है 6 रियासतों का ये राजा

30 मार्च को राजस्थान का स्थापना दिवस है। जिसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस मौके पर लाइव न्यूज आपको बता रहा है राजस्थान और देशभर से जुड़े यहां के कल्चर के बारे में। 

राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां के राजघरानों और महलों की चर्चा विदेशों तक में होती है। जो आज भी उसी ठाठ के साथ रहते हैं, लेकिन कई किस्से ऐसे भी हैं जिसमें राजस्थान सहित देश के कुछ राजघराने गुमनामी का शिकार हो गए। आज हम आपको बताने जा रहा है अर्श से फर्श तक पहुंचने वालीं ऐसे ही 10 रियासतों की कहानियां। 
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से करीब 60 किमी दूर टिगिरिया रियासत के पूर्व राजा ब्रजराज महापात्रा कई नौकर-चाकर और 25 कारों के मालिक थे।  इनके पूर्वजों ने राजस्थान से टिगिरिया जाकर एक नई रियासत बसाई थी। तिगिरिया के राजा ओडिशा के आखिरी शासक माने जाते थे। एक जमाने में उनके पास 6 रियासतें और 25 लग्‍जरी कारें हुआ करती थीं। 
उनके महल में करीब 30 नौकर काम किया करते थे। वह अपने इलाके में अपने शाही शिकार के लिए भी मशहूर थे। उन्‍होंने 13 बाघों और 28 तेंदुओं का शिकार किया। हालांकि, आजादी के बाद उनका यह साम्राज्‍य धीरे-धीरे अपनी चमक खोता चला गया। 
आजादी के बाद इस राजपरिवार से राजस्‍व उगाही के अधिकार ले लिए गए और उन्‍हें महज 130 पाउंड की पेंशन पर रहने को मजबूर कर दिया गया। 
इसके चलते राजपरिवार को महज 600 पाउंड में अपना पूरा महल बेचना पड़ा। बाद में इंदिरा सरकार ने पेंशन भी बंद कर दी। राजपरिवार के वारिस ब्रजराज क्षत्रिय बीरबर छामुपति सिंह को गांव वालों की दया पर झोपड़ी में बचा-खुचा जीवन गुजारना पड़ा था। 30 नवंबर 2015 को 95 साल की उम्र में इस राजा की मौत हो गई थी।

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