Thursday, 23 March 2017

अफवाहों से सावधान! तेजबहादुर यादव याद है?

तेजबहादुर के मरने की बताई जा रही है ये वायरल तस्वीर, क्या है सच?

बीएसएफ़ का वो जवान जिसने ये शिकायत की कि जवानों को कड़ी ठंड में, तूफ़ान में बारिश में खड़ा होना पड़ता है, लेकिन उन्हें खाने को जली हुई रोटियां और पानी जैसी दाल मिलती है. न नमक, न अचार, न सब्ज़ी. सेना के अफसरों पर खुलेआम उन्होंने आरोप लगाए. कहा कि सारा राशन इनके पास आता है और ये अफ़सर राशन बेच कर पैसे बनाते हैं.  इस तरह रातोंरात तेजबहादुर सबसे ब़ड़ी खबर बन गए. कुछ लोग उनके पक्ष में खड़े हुए, कुछ उनकी ही देशभक्ति और मानसिक हालत में खामियां खोजने लगे.
लेकिन अब तेजबहादुर यादव की मौत की अफवाह फैल रही है
एक फेसबुक पेज है. पेज का नाम है ‘कनाडा दे पंजाबी’ इस पेज ने बुधवार को एक फ़ोटो अपलोड की जिसमें लिखा था कि “भारत में कोई भी अपनी जुबान नहीं खोलेगा. इन्होंने हमारे फौजी भाई को मरवा दिया. वाहेगुरु उसकी आत्मा को शांति दे. अपना फ़र्ज़ समझ कर इसे ज़्यादा से शेयर करें ताकि मीडिया तक पहुंच सके.” (ये कैप्शन पंजाबी में लिखा है जिसे हमने हिंदी में ट्रांसलेट किया है.                                                                                                                                 
 ये तस्वीर असली तो है मगर तेजबहादुर यादव की नहीं. ये तस्वीर है CRPF के उन जवानों में से एक की है, जो सुकमा के नक्सली हमले में शहीद हो गए थे. इसी 11 मार्च को हुए हमले में कुल 11 जवान शहीद हुए थे. इस बारे में प्रधानमंत्री ने ट्वीट भी किया था.



इस तस्वीर को और भी जगहों पर पाया जा सकता है. सभी जगहों पर इसके बारे में नक्सल अटैक का ही नाम आ रहा है.
जिस जवान की तस्वीर इस पेज ने शेयर की थी, वो जवान सुकना के नक्सल हमले में शहीद हुआ था और वो यकीनन तेजबहादुर यादव नहीं था. बस बात इतनी सी है कि तेज बहादुर और उस शहीद जवान की शक्ल में काफ़ी समानता है.
तेज बहादुर के घर जब उनकी पत्नी से बात की गई तो उनकी पत्नी ने भी तेजबहादुर की मौत के बारे में फ़ैली ख़बरों को झूठा बताया. बुधवार रात तक फेसबुक पेज पर डाली गई तेज यादव की मौत की झूठी ख़बरों को 20 से 25 हज़ार शेयर मिल चुके थे. यानी ये खबर इस कदर फ़ैली कि बहुत सारे लोगों ने इसे सच ही मान लिया. और फिर बुधवार रात (इंडिया के हिसाब से) उसी पेज ने उस पोस्ट को डिलीट कर ये साफ़ किया कि उन्होंने ग़लत ख़बर दी थी.
इस पोस्ट में भी जो लिखा है वो पंजाबी में लिखा है. वहां माफ़ी मांगी गई है और ये बताया गया है उनकी खबर झूठी थी. “दोस्तों, किसी ने अफवाह फैला दी थी. हमारा वीर जवान अभी भी ज़िन्दा है और ये भगवान को प्यारा नहीं हुआ है. ये सब झूठ है. ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करो ताकि सभी लोगों को पता चल सके.”
लेकिन सोशल मीडिया पर होता ये है कि यहां माफ़ियों की कोई ख़ास जगह नहीं है. यहां माफ़ियां काम नहीं करती हैं. यहां एक खबर चल जाती है तो वही सोर्स जब उसे झूठा बतला दे तो भी उसे जनमानस अपने मन में झूठा नहीं ठहरा पाता. और ऐसा ही इस केस में भी है. तमाम जगहों पर इसी तस्वीर के साथ ये खबर पाई गई कि तेज बहादुर को मार दिया गया है.
तेज बहादुर यादव का वीडियो यहां देखें:

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