Friday, 31 March 2017

कौन है सोनिया गाँधी

सोनिया गाँधी की सम्पति 1 .23  लाख करोड़ रुपये तक है जबकि  वे एक  साधारण  घर से  थी 
कौन है सोनिया गाँधी 
सोनिया एंटोनिया माइनो (सोनिया गांधी)
 जैसा की हमें नाम से ही पता चलता हैं की सोनिया जी इटालियन है और उनका पासपोर्ट भी इटालियन हैं | जबकि इनका शादी राजीव गाँधी के साथ हुआ था| इसीलिए इन्होने कभी भी अधिकारिक रूप से आपना टाइटल नही बदला | वैसे आपको बता दे की राजिव गाँधी और सोनिया गाँधी के मिलने की कहानी भी काफी विवादश्पद हैं आखिर काम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की हुई स्टूडेंट की क्या मजबूरी हो सकती है की वो एक बार डांसर का कम करे और वासना को खुलेयाम परोसे | जरा सोचिये भारत जैसी पवित्र संस्कृति आज किन लोगो के हाथ में हैं और ऐसा सिर्फ और सिर्फ हमारी उदासीनता के कारन ही हैं | 

सोनिया गाँधी का जन्म के समय उसके पिता पिछले 4 साल से जेल में थे !!!!
आज हम सोनिया गांधी के जीवन से जुड़े कई रहस्यों को उजागर करेंगे | और सही मायने में कैसे इन्होने हवा बना कर हमारे भोले-भाले देशवाशियो को ठगने का काम किया हैं |
राजिव गाँधी : वाश्त्विक नाम राजिव खान ,आप फ़िरोज़ खान और इंद्रा प्रियदर्शनी के बेटे हैं.... जन्म से आप मुस्लिम हैं... और भारतीय जनता को भावुकता पूर्ण रूप से लालच देने के लिए खान की जगह गाँधी का उपयोग किया है 
सोनिया गाँधी के सामाजिक या फिर अधिकारिक पिता का नाम स्तेफानो यूजीने मैनो (Stefano Eugene Maino) हैं | सोनिया के पिता जर्मन थे | और हिटलर की आर्मी के मेम्बर भी थे | जब ज़र्मन सेना रूस गई तो वह वो रौस्सियन आर्मी द्वारा पकड़ी गई और उन्हें २० साल की सजा सुनाई गई थी | लेकिन कुछ ही समय में सोनिया के पिता KGB के लिए काम करने लगे फिर उनकी सजा २० साल से कम करके 4 साल कर दी गई | और जब उसने आपनी सजा खत्म करके घर लोटा तो उसने अन्तोनिया albina maino का नाम जो इटालियन था बदल कर सोनिया रख दिया जो की एक रुस्सियन नाम है | 

सोनिया गाँधी दावा करती है की उनका जन्म बेसनो (besano) इटली में हुआ है | जहाँ तक सोनिया गाँधी के जन्म प्रमाण पत्र की बात माने तो सोनिया का जन्म लुसिआना में हुआ था जो की इटली और स्विट्ज़रलैंड के बॉर्डर पे स्थित हैं | ये शहर जर्मन आर्मी के लिए सैर -सपाटा और मजे करने के लिए उस समय प्रसिद्ध था |

शिक्षा : सोनिया गाँधी ने तो सुरुआती दौर में indian govt को ये बताया की वो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से शिक्षा ली है जो की बाद में गलत साबित हो गया | उसने एक और दावा किया था की वो बेल एजुकेशन ट्रस्ट से इंग्लिश की स्टडी की है जो की ये भी बाद में गलत साबित हो गया. 
जहा तक सोनिया गाँधी के शिक्षा की बात है ऐसा कोई भी दस्तावेज़ नही मिला है जिसके अधार पर ये कहा जा सके की वो ५वि पास है |
नागरिकता : अधिकारिक रूप से सोनिया गाँधी के पास भारतीय नागरिक होने का अधिकार नही है | इंद्रा गाँधी ने अपने power का उपयोग किया और गैरकानूनी तरीके से सोनिया गाँधी को भारत के राजनीती में पूर्ण भागीदारी का रास्ता बनाया | सारे दस्तावेज़ , प्रमाण होने का बावजूद भी क्या गृह मंत्रालय ने कभी इस बात पर ध्यान भी दिया? क्या आज़ादी का मतलब यही है ?

धर्म: क्रिस्तियानिती ,इटली में सोनिया गाँधी की बहन alexandria ( अनुष्का ) की अपनी दो दुकाने है जिनमे भारत से चुराई गई मुर्तिया बेचीं जाती है | सोनिया गाँधी अपने ताकत के बलबूते पर अवैध रूप से इन मूर्तियों का हवाई मार्गो से तस्करी कराती हैं | 
BY SUBRAMANIAM SWAMI 

सोनिया का वास्तविक परिचय एवं प्रेम कहानी
यह अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि सैकड़ों वषोर्ं से हमारे देश के लोगों को उनके शासकों के वास्तविक परिचय से अंधेरे में रखा गया। मैं यहां इस देश के आम लोगों की बात नही कर रहा हूँ जिन्हे कि षड़यंत्र के तहत शिक्षा एवं साक्षरता से दूर रखा गया तथा किसी तरह से वे अपना जीवन यापन करते रहे हैं। मै उन बुद्धिजीवियों की बात कर रहा हूँ जो कि समलैंगिकों के अधिकारों की वकालत करते नही थकते परंतु उन्हे हमारे देश में शासन कर रहे विदेश में जन्में नेताओं के इतिहास का भान नही है। आज हालात इतने बिगड़ गये हैं कि आज सारा देश एक ऐसी विदेश में जन्मी महिला के आस-पास धूम रहा है जिसके विषय में किसी को कोर्इ जानकारी नही है। 3
क्या आप ने इस बात पर ध्यान नही दिया कि हमें सोनिया गाँधी के इतिहास, पृष्ठभूमि, उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि उसके भार्इ-बहनों, उसके पिता क्या व्यवयाय किया करते थे, वह किस गांव या शहर की रहने वाली है, आदि के बारे में कोर्इ जानकारी नही दी जाती। केवल हमें यह बताया जाता है कि वे गाँधी नेहरु खानदान की बहू हैं इसलिए उन्हे हमारे उपर शासन करने का अधिकार है। तथा यही उनकी पहचान है। भारत में हमें राजीव के दादा का नाम तक नही बताया जाता। हमें यह नही बताया जाता कि जवाहर लाल नेहरु की मौत किस बीमारी से हुर्इ। तथा जवाहर लाल नेहरु का यह नेहरु सरनेम कहां से आया। अगर मोती लाल के पिता का नाम गंगा धर था तो मोतीलाल का नाम मोतीलाल धर क्यों नही पड़ा? मोतीलाल नेहरु कैसे पड़ गया? हमें ऐसी तमाम बातें जाननी होंगी जो कि हमे नही बताया जा रहा है। मै जो कुछ भी बता रहा हूँ ये वे सूचनाएं हैं जो कि पूरी दुनिया में यहां वहां बिखरी पड़ी हैं। 3
यह 21वीं सदी की सबसे रहस्यमयी महिला की कहानी है। वह महिला जो कि भारत की प्रधानमंत्री बनने के कगार पर थी। जैसे-जैसे उसके जीवन पर शोध किया जाता है, वह और भी रहस्यमयी होती जाती है। इस महिला के बारे में अंतिम सत्य क्या है। न तो यह महिला स्वयं बताना चाहती है न ही किसी सामान्य मानव के लिए इसकी सभी सच्चार्इयों को जानना संभव है। यह पूरी किताब केवल इस रहस्यमयी महिला के जीवन के बारे में सूचनाएं एकत्रित कर जनता के समक्ष लाने का गंभीर प्रयास है। इसमें मैं कहां तक सफल हुआ हूँ यह आप ही बता सकेंगे।
सोनिया गाँधी कैथोलिक इसाइ हैं तथा अपने धर्म व देश से बहूत प्रेम करती हैं। यही कारण है कि जब उनको अपनी लड़की का विवाह करना था तो उसके लिए उन्होने इटली की महिला श्रीमति वढे़रा को चुना तथा उनके पुत्र राबर्ट वढ़ेरा जो कि स्वभाविक है इसाइ ही हैं से विवाह किया गया। इस देश के बहूत कम लोग जानते हैं कि सोनिया गाँधी की समधन इटली की नागरिक हैं तथा श्रीमति वढे़रा ने अपने पति एरिक पढेरा को लंबे समय से उसी प्रकार छोड़ रखा है, जैसे राजीव के जन्म के बाद इंदिरा गाँधी ने अपने पति फिरोज खान उर्फ फिरोज गाँधी को छोड़ रखा था।
प्रधानमंत्री बनने के बाद सोनिया क्या करेंगी पक्के तौर पर कहना मुशिकल है परंतु थोड़ा बहूत उसका अनुमान हम उनकी काँग्रेस अध्यक्ष के रुप मे उनके क्रियाकलापों को देखकर लगा सकते हैं।
काँग्रेस अध्यक्ष के रुप में उनके कार्यकाल में दो इसाइ मुख्यमंत्री ऐसे राज्यों में बने जो कि इसाइ बहूल नही हैं। केरल में ए.के. एन्टोनी तथा छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया गया। अपनी लड़की का विवाह उन्होने इतावली महिला के लड़के से किया वह भी इसाइ से।
यह एक तथ्य है कि इटली मूल की सोनिया ज्यादातर इसाइ लोगों से ही सम्बन्ध बनाने में विश्वास करती हैं। उनके काँग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद से राजीव गाँधी के ज्यादातर मित्रों को दरकिनार कर दिया गया है। इस समय उनके सचिव के पद पर शकितशाली इसाइ आस्कर फर्नांडिस विराजमान हैं। मध्यप्रदेश में उनके मुख्यमंत्री हिंदू विरोधी हो हल्ले में शामिल हैं तथा यह सलाह वे दलितों को देते रहे हैं कि उन पर अत्याचार न हो इसलिए वे नये धर्म को अपनाए। (फरवरी 2003 भोपाल घोषणापत्र)। झाबुआ मे जब इसाइ ननों के साथ बलात्कार की घटना घटित हुर्इ तो उन्होने आँख मंूद कर इसका दोष विश्व हिन्दु परिषद तथा बजरंग दल जैसे संगठनों पर मढ़ दिया परंतु जब बाद में कुछ इसाइयों को जिन्होने बलात्कार किया था पकड़ लिया गया तो उन बलात्कारियों की जमानत कराने के लिए कुछ काँग्रेसी नेता सक्रिय देखे गये जिनमें मध्यप्रदेश शासन के प्रभावशाली मंत्री भी थे जिनके मित्र उस समय झाबुआ में न्यायधीश हुआ करते थे। इसके बाद सोनिया गाँधी ने चुप्पी साध ली। छत्तीसगढ़ में भारी मात्रा में धर्मपरिवर्तन की घटनाएं हुर्इ हैं। झारखंड में काँग्रेस पार्टी के नेता पीटर मुंडा हैं, जो कि एक इसाइ हैं। जबकि झारखंड राज्य हिंदू बहूल राज्य है। कुल मिला कर जहां-जहां संभव हैं, सोनिया इसाइयों को पद प्रदान करती हैं तथा जहां ऐसा संभव नही है, वहां ऐसे लोगों की नियुक्त करती हैं, जो कि धर्मपरिवर्तन को मूक समर्थन प्रदान करते हैं।
जब विश्व के ज्यादातर लोकतांत्रिक देश, विदेशों में जन्मे व्यकित को अपने यहां राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री जैसे पदों पर नही बैठने देते तो हम क्यों ऐसा होने दें? अगर हमने विदेशी नागरिकों को अपने उपर शासन करने की छूट प्रदान किये तो वह दिन दूर नही जब ओसामा बिन लादेन, हिटलर, मुसोलिनी आदि की मानसिकता वाले व्यकित हमारे उपर शासन करना प्रारंभ कर दें, जिनका प्रमुख उíेश्य अपनी संस्कृति तथा धर्म को हमारे उपर लादना है।
सोनिया भूलवश भारत की नागरिक नही बन पार्इं हो, अगर ऐसा कोर्इ व्यकित सोचता है, तो यह गलत है। सच्चार्इ यह है कि सोनिया प्रत्येक पांच वर्ष बाद विदेशी कानून के तहत भारत में रहने का परमिट लिया करती थीं। यह परमिट उन लोगों को दिया जाता है जो कि अस्थार्इ तौर पर भारत रहने आते हैं। सोनिया ने सर्वप्रथम भारत में रहने का परमिट 1968 मे प्राप्त किया। 1973 मे पांच वर्ष की समापित पर, अगर वे चाहतीं तो भारत की नागरिक बन सकतीं थीं परंतु उनका दिमाग उस समय किसी भी तरह से भारतीय नागरिक बनने के बारे में नही सोच रहा था। 1973 मे उन्होने आवेदन करके पुन: अगले पांच वर्षों तक भारत में रहने का परमिट प्राप्त किया। 1978 में उन्होने पुन: अगले पांच वर्षों के लिए भारत में रहने का परमिट लिया। यह बातें स्पष्ट दर्शाती हैं कि सोनिया भारत की नागरिक बनना नही चाहती थी। आखिरकार वे प्रत्येक पांच वर्ष में भारत में रहने का परमिट तो लेते ही रहती थी। अब वे हमारे देश की भोली भाली जनता को यह बताकर बेवकूफ बनाने का प्रयास कर रहीं हैं कि जिस दिन वे इदिरा जी के यहां बहू बन कर आर्इ उसी दिन से भारत की नागरिक बन गयी बाकी सब तकनीकी मामला है।
भारत का नागरिक बनने का आवेदन सोनिया ने एन्टोनिया नाम से किया था। आज हम सभी उन्हे जिस नाम से जानते हैं, उस नाम का प्रयोग करने में उन्हे उस समय शर्म महसूस होती थी। उस समय वे अपना इसाइ नाम एन्टोनिया ही इस्तेमाल करती थीं।
हमारे देश का हिन्दु हो या मुसलमान अगर उनके यहां कि लड़की या लड़का किसी अन्य धर्म की लड़की या लड़के से विवाह कर ले तो उसका भारी विरोध हम सभी करते हैं। परंतु जब यही हरकत राजीव गाँधी ने की तो हममे से किसी ने इस पर उंगली उठाना उचित नही समझा। केवल इसलिए क्योंकि गाँधी नेहरु खानदान का व्यकित जो कुछ करे हम उसे आदर भाव से देखते सुनतेे व समझते हैं। सोनिया गाँधी कोर्इ पर्चा लेकर स्टेज पर खड़े होकर पढ़ना शुरु कर दे तो सोनिया गाँधी जिन्दा बाद के नारे कम नही होते। लगता है पता नही कौन सा ज्ञान उसमें से टपकता है। वहीं अगर हमारे घर का बच्चा हमे सोनिया जैसे हिन्दी पढ़कर सुनाना प्रारंभ कर दे तो हम उसे तुरंत थप्पड़ रसीद करते हैं, यह हमारी गुलाम मानसिकता का धोतक है।
बताया जाता है कि राजीव गाँधी ने विवाह के पूर्व कैथोलिक इसाइ धर्म अपना लिया था। अगर यह सच नही है तो जिस प्रकार से सोनिया राजीव के बच्चों का विवाह कैथोलिक इसाइ के साथ चुन चुनकर, कर रहीं हैं, यह अच्छी बात नही है।अगर राजीव ने इसाइ धर्म गृहण कर लिया था तो कम से कम मैडम को यह बात जनता से बताना चाहिए। हालांकि राजीव के पिता की तरह राजीव का भी दाह-संस्कार किया गया था, परंतु नेहरु-गाँधी खानदान का कोर्इ भरोसा नही। वे किसी भी धर्म के व्यकित का दाह-संस्कार कर सकते हैं।
सोनिया का जन्म - सोनिया के सम्बन्ध में आज हमें जो कुछ भी बताया जाता है वह तीन बड़े झूठों पर आधारित है। 1
सोनिया का वास्तविक नाम - सोनिया गाँधी का असली नाम एन्टोनिया मैनो है। सोनिया गाँधी का नाम सोनिया किसने रखा? इस सम्बन्ध में भी बहूत सी दंतकथाएँ व्याप्त हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सोनिया गाँधी का नाम सोनिया वे इंग्लैंड में जिस अंग्रेज दंपत्ती के यहां नौकरानी का काम किया करती थी, उन्हाने रखा था, तो कुछ दंतकथाओं के अनुसार सोनिया गाँधी का नाम सोनिया, लंदन में वे जिस होटल में काम किया करती थी, उन्होने रखा था। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सोनिया का नाम सोनिया इंदिरा गाँधी ने रखा था। मेरी जानकारी के अनुसार सोनिया का नाम एन्टोनिया से सोनिया उनके स्वर्गीय पिता स्टीफानों मैनो ने रखा था। स्टीफानों लंबे समय तक रुस की जेल में रहने के बाद रुस की संस्कृति से काफी प्रभावित हो गये। जब उन्हे पता चला कि इटली के तानाशाह मुसोलिनी का साथ देने के कारण उनकी सम्पत्ति को अमेरिका की सेना ने जप्त कर लिया है तो वे और भी रुस की ओर झूक गये तथा जेल से वापस आने के बाद उन्होने अपनी पुत्री का नाम एन्टोनिया से सोनिया रख दिया जो कि एक रसियन नाम है। यह कोर्इ अंतिम सत्य नही है उम्मीद हैं कि सोनिया गाँधी स्वयं समय आने पर रहस्योदघाटन करेंगी कि इनमें से सच क्या है? खैर महत्व की बात यह है कि आज हम जिस नाम से उन्हे जानते हैं वह उनका असली नाम नही है। उनका इसाइ नाम एन्टोनिया है तथा भारत की नागरिकता प्राप्त करते समय भी उन्होने आवेदन पत्र में इसी नाम का प्रयोग किया था तथा इसी नाम से उसमें हस्ताक्षर भी की थी। 1
सोनिया गाँधी का जन्म स्थान, जन्म तिथि तथा उसके पिता का फासीवादियों से सम्बन्ध - हम सभी जानते हैं कि सोनिया का जन्म इटली में हुआ था। इटली के किस स्थान पर सोनिया गाँधी का जन्म हुआ था यह एक शोध का विषय है। संसद में दी गयी जानकारी के अनुसार सोनिया का जन्म इटली में तुरीन प्रांत के ओरबासानों नामक गांव में 9 दिसंबर 1946 में हुआ था। वास्तव में सोनिया गाँधी का जन्म ओरबासानो में नही अपितु लुसियाना में 1944 में हुआ था जैसा कि उनके बर्थ सार्टिफिकेट में वर्णित है। सोनिया का अपने वास्तविक जन्मस्थान छुपाने का एक कारण उनके पिता का नाजियों तथा मुसोलिनी के फासिस्टों से सम्बन्ध है। जो कि 1945 से अभी तक भूमिगत तौर पर इटली में कार्य कर रहे हैं। लुसियाना वह स्थान है जहां नाजियों तथा फासिवादियों का हेडक्वाटर है। तथा इटली तथा स्वीटजरलैंड की सीमा पर सिथत है। 1 सोनिया का अपने जन्म स्थान व जन्म के समय के संबध में झूठी जानकारी देने का एक और कारण उसके पिता का 1942 से लेकर 1945 तक रुस की जेल में बंद रहना है। जबकि सोनिया गांधी का वास्तविक जन्म लुसियाना प्रांत का 1944 का है। यही कारण है कि वे अपना जन्म 1946 का बताती हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि पश्चात्य संस्कृती में यह सब आम बात है। अगर सोनिया गांधी भारतीय जनता को विश्वास में लेकर सच्चार्इ बताएंगी तो जनता उसे अवश्य स्वीकार कर लेगी।
सोनिया गाँधी की शैक्षणिक योग्यता - सोनिया हार्इस्कूल से ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं। उन्होने 2004 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इस बात का झूठा शपथपत्र दिया था कि वे प्रख्यात कैमिब्रज विश्वविधालय से अंग्रेजी में डिप्लोमा धारक हैं। 1
सत्य यह है कि सोनिया ने पढ़ार्इ करने के उíेश्य से किसी कालेज का मुंह नही देखा। उसने कैथोलिक इसाइयों द्वारा चलाये जा रहे गियावेनों (जो कि ओरबासानों से 15 किमी दूर सिथत है) के सेमिनरी स्कूल में जिसका नाम मारिया आसीलियेटि्रस स्कूल है में अध्यन किया था। इटली में उन दिनों जवान लड़कियां पहले इस प्रकार के इसाइ स्कूलों में शिक्षा लेती थीं तथा उसके बाद कमाने के उíेश्य से इंगलैंड चली जाती थीं। जहां उन्हे धरेलू नौकरानी तथा होटल में नौकरानी के रुप में कार्य करना होता था। मैनों परिवार तथा सोनिया कि सिथति भी उन दिनों कुछ ऐसी ही थी। सोनिया गांधी के पिता गुप्त समुदाय का सदस्य था तथा माता एक छोटी किसान थी। 1
सोनिया अपनी प्रारंभिक पढ़ार्इ के बाद कैमिब्रज गयी तथा धरेलू नौकरानी के लिए जो अंग्रेजी की जानकारी आवश्यक थी उस जानकारी को उन्होने लीनक्स स्कूल जो कि 1970 में बंद हो चुका है में प्राप्त की। कुल मिलाकर यही शिक्षा है जो सोनिया ने कैमिब्रज में प्राप्त की थी। जिसका एकमात्र उíेश्य धरेलू नौकरानी का कार्य प्राप्त करना था। यहां मै यह बताना आवश्यक समझता हूँ कि लीनक्स स्कूल कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय से संबद्ध नही रहा है तथा सोनिया गाँधी का यह दावा कि उन्होने कैमिब्रज विश्वविधालय से अंग्रेजी में डिप्लोमा प्राप्त किया है पूर्णत: झूठा है। सोनिया का रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी तथा अन्य जगहों पर अपनी शैक्षणिक योग्यता की झूठी जानकारी प्रदान करने का उíेश्य यह है कि वे एक पढ़ी लिखी महिला हैं तथा उनकी राजीव गाँधी से मुलाकात कैमिब्रज विश्वविधालय में शिक्षा प्राप्त करते हुए हुर्इ थी। झूठ बोलने का एक अन्य कारण भारतीय समाज में शिक्षा को प्राप्त उच्च स्थान है। सोनिया को यह भी आशंका रही है कि अगर वे यह नही बतायेंगी कि वे शिक्षा प्रापित के उíेश्य से कैमिब्रज गयीं थी तो जनता जानना चाहेगी कि आखिर वे वहां क्या कर रहीं थी व इस प्रकार के प्रश्नों का जवाब देना सोनिया गाँधी नही चाहती हैं। सोनिया गाँधी के द्वारा संसद में झूठी जानकारी प्रदान करना संसद के नैतिक मूल्यों की अवहेलना है तथा सोनिया द्वारा झूठी जानकारी निर्वाचन अधिकारी को प्रदान करना भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत अपराध है। आम आदमी की भाषा में इसे चार सौ बीसी या दस नंबरी कहा जाता है जिसे कि 10 जनपथ के साथ मिलाने की आवश्यकता नही है। 1
दिनांक 1 जून 2004 को मनोज कौशिक ने प्रेस सेंटर कैमिब्रज विश्वविधालय को पत्र लिखकर सोनिया गाँधी तथा उनकी शिक्षा के सम्बन्ध में जानकारी चाही जिसके जवाब में जो पत्राचार हुआ तथा अंत में जो जवाब कैमिब्रज विश्वविधालय से प्राप्त हुआ उसका सीधा सीधा अर्थ यह था कि सोनिया गाँधी कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय की छात्रा नही रहीं हैं तथा लीनक्स स्कूल कभी भी कैमिब्रज विश्वविधालय से संबद्ध नही रहा है। पत्राचार की अंग्रेजी संस्करण इस किताब के संलग्नक एक के रुप में लगाया गया है।
इस सम्बन्ध में डा0 सुब्रमणयम स्वामी ने रायबरेली के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष एक आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। परंतु इस सम्बन्ध में किसी डी0एम0 से न्याय की अपेक्षा करना मुशिकल ही है। डा0 स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि सोनिया गाँधी पुरातातिवक महत्व की वस्तुओं की तश्करी की दोषी हैं तथा वे इस सम्बन्ध में सभी सक्षम कदम उठाएंगे। 5
सोनिया के पिता - स्टीफानो मैनो कौन थे यह पता करना भी एक कठिन कार्य था। परंतु ''वायस आफ जम्मू एण्ड कश्मीर पत्रिका में छपे लेख के अनुसार सोनिया के पिता स्टीफानो मैनो उन लोगों मे से एक थे जो कि बैटीनो मुसोलिनी जो कि इटली के तानाशाह थे तथा जिन्होने जर्मनी के तानाशाह हिटलर से हाथ मिला रखा था, की सेना में काम किया करते थे। सोनिया के पिता का प्रमुख कार्य वामपंथियों को बांधकर उन्हे रेड़ी का तेल पीने हेतु मजबूर करना तथा रेड़ी का तेल पिलाना था। बाद मे मैनो की कार्यप्रणाली से तानाशाही शासन काफी प्रसन्न हुआ तथा उनका प्रमोशन करके उन्हे पूर्वी मोर्चे पर रुस से लड़ने भेज दिया गया था।
नौकरानी के रुप में यूनानी रेस्टारेंट में कार्य तथा राजीव गाँधी से मिलन - होटल में काम प्राप्त करने के लिए जितनी अंग्रेजी आवश्यक होती है उतनी अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त कर लेने के पश्चात सोनिया गाँधी को होटल में बच्चों को खिलाने का कार्य मिल गया। 1
राजीव गाँधी का संक्षिप्त परिचय - सोनिया के पति राजीव के बारे में हालांकि आप सभी सोचते होंगे, कि आप सभी सब कुछ जानते हैं परंतु तो भी मैं राजीव के जीवन पर प्रकाश डालना चाहूँगा। उम्मीद है कि, कुछ नयी जानकारी आपको अवश्य प्राप्त होगी। राजीव के पितामह नवाब खान जूनागढ़ गुजरात के रहने वाले थे तथा इलाहाबाद में शराब का धंधा किया करते थे। राजीव गाँधी के पिता का नाम फिरोज खान था जो कि आनंद भवन में शराब सप्लार्इ किया करते थे। कुछ लेखकों का कहना है कि इंदिरा गाँधी ने फिरोज खान से निकाह करने के पहले इस्लाम धर्म गृहण कर लिया था परंतु महात्मा गाँधी के दवाब में फिरोज खान का सरनेम बदलकर गाँधी कर दिया गया तथा बाद में उनका वैदिक विवाह कराया गया। यह शत-प्रतिशत सत्य है कि, राजीव के पिता इस्लाम धर्म को मानने वाले थे। यह अलग बात है कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हे दफनाने की जगह उनका दाह-संस्कार किया गया। दाह-संस्कार के पीछे प्रमुख कारण, इस देश की हिंदू बहूल आबादी को इस बात का एहसास कराना था कि, फिरोज खान मुसिलम नही थे। धर्म निरपेक्षता का ढिंडोरा पीटने वाला नेहरु-गाँधी खानदान इस बात से सदैव डरता रहा कि कहीं उनकी सच्चार्इ आम जनता को पता न चल जाए। (यहां मुसिलम भार्इयों को गौर फरमाना चाहिए कि हिन्दुओं को खुश करने के लिए नेहरु-गाँधी खानदान के लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं, यहां तक कि एक मुसिलम का मरने के बाद दाह-संस्कार भी कर सकते हैं।) इसके बाद हद तो तब हो गयी जब राजीव गाँधी ने लंदन में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वे पारसी धर्म को मानने वाले हैं। जिसके माता-पिता-दादा तीनो पारसी न हों वह पारसी कैसे हो सकता है? इसका जवाब कम से कम मै तो नही दे सकता। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि राजीव गाँधी एण्ड कम्पनी अपने को मुसिलम बताने मे शर्म महसूस करते हैं। वहीं राजीव गाँधी के पुत्र राहुल गाँधी अपने पिता से भी दस कदम आगे हैं। वे भी जनता को नही बताना चाहते कि वे कैथोलिक इसाइ हैं। यही कारण है कि उनका शिगुफा यह है कि उनका धर्म तिरंगा झंडा है।
राजीव गाँधी उच्च शिक्षा की प्रापित हेतु कैमिब्रज विश्वविधालय गये। वहां तीन वर्षों तक एक ही कक्षा में फेल होने के बाद उनका नाम काटकर उन्हे वहां से निकाल दिया गया। हो सकता है राजीव गाँधी सोनिया के प्यार में उलझने के कारण न पढ़ पाये हों या हो सकता है कोर्इ अन्य कारण इसके लिए उत्तरदार्इ रहा हो। परंतु एक ऐसे व्यकित को जो कि तीन वर्षो तक कैमिब्रज में रहकर एक कक्षा भी पास नही कर पाया उसे भारत में इस प्रकार से प्रस्तुत किया गया जैसे उनसे अधिक विद्वान व्यकित देश-विदेश में कोर्इ न हो। उन्हे मिस्टर क्लीन की उपाधि से नवाजा गया। राजीव गाँधी को पायलेट का लायसेंस कैसे प्राप्त हुआ, इस पर भी शोध किया जा सकता है, मुझे उम्मीद है कि बहूत से रहस्य के पर्दे वहां से भी उठेंगे।
सोनिया व राजीव के बीच प्रेम सम्बन्धों का प्रारंभ - राजीव गाँधी भारतीय पिं्रस आफ वेल्स से जब सोनिया गाँधी मिली उस समय वो एक 18 वर्ष की जवान सुदर लड़की थी जो कि वेरासिटी रेस्टारेंट में नौकरानी के रुप में कार्य करती थी।
सोनिया के अपने शब्दों में ''जैसे ही हमारी नजरें पहली बार मिलीं। मुझे महसूस हुआ कि मेरा दिल धड़क रहा है ............. जहां तक मेरा सम्बन्ध है। यह पहली नजरों में ही प्यार था। (एस आवर आर्इस मेट फार द फस्ट टार्इम। आर्इ कुड फील मार्इ हर्ट पाउंडिंग। ...... एस फार एस आर्इ वास कन्सर्नड। इट वाज लव एट फस्ट सार्इट) सोनिया ने अपने परिवार के लोगों को बाद में बताया ''वो वही राजकुमार है जिसकी कल्पना मैने हमेशा से की थी। (ही इज द ब्लू प्रिंस आर्इ आलवेज डिम्ट आफ)
सोनिया ने अपने स्वयं के वक्तव्य में यह बात स्वीकार की है कि वह किसी राजकुमार की तलाश में थी। अब मुíे का प्रश्न यह है कि ये ब्लू प्रिंस रेस्टारेंट में कैसे पहुँचे यह एक खोज का विषय है। इस सम्बन्ध में जो कोर्इ भी थोड़ा बहूत प्रकाश डालने की सिथति में थे वे भगवान को प्यारे हो गये हैं।
यह आँखों का मिलन कैसे प्यार के रुप में परवान चढ़ा यह जवाब देने की सिथति में कम से कम मै नही हूँ। राजीव गाँधी को रेस्टारेंट में कौन लेकर गया था यह हमेशा रहस्य ही रहेगा। मै ऐसा क्यों कह रहा हूँ शायद आप पूरी किताब पढ़ने के बाद समझ पायें।
अगर उनकी मुलाकात कैमिब्रज विश्वविधालय में कोर्इ होना बताये तो यह भी एक शोध का विषय हो सकता है कि जब सोनिया कैमिब्रज विश्वविधालय की छात्रा ही नही थीं (हालांकि उन्होने ऐसी जानकारी संसद में पूर्व में दे रखी थी) तो फिर वे वहां क्या करने जातीं थी? खैर इस पर टीका-टिप्पणी करने की आवश्यकता इसलिए नही है, क्योंकि यह विषय उतना महत्वपूर्ण नही है।
सोनिया गाँधी के पाकिस्तानी एजेंट होने के संदेह वाले व्यकित से सम्बन्ध - जैसा की उपर वर्णित किया जा चुका है अंग्रेजी सीखने के बाद सोनिया नौकरानी के रुप में वेरासिटी रेस्टारेंट में कार्य करने लगी। राजीव गाँधी से उसकी मुलाकात 1965 में उस वक्त हुर्इ जब वो रेस्टारेंट में गये हुए थे। उस समय राजीव कैमिब्रज विश्वविधालय के छात्र हुआ करते थे। परंतु वहां की कठिन पढ़ार्इ वे लंबे समय तक नही झेल पाये। अत: 1966 में वे लंदन पहुँच गये। जहां वे कुछ समय तक इमिपरियल कालेज आफ लंदन में कुछ समय के लिए छात्र रहे। इसी समय सोनिया भी लंदन आ गयी तथा डा0 सुब्रमण्यम स्वामी को प्राप्त सूचना के अनुसार वहां उसे सलमान थासिर नाम के एक सख्श के पास काम मिल गया। जो कि एक लाहौर का रहने वाला बड़ी संपत्ति का मालिक था जिसका आयात निर्यात का कारोबार था तथा जिसका मुख्यालय दुबर्इ में था। वो अपना अधिकतर समय लंदन में ही काटा करता था। यह पूरा विवरण अगर ध्यान से पढ़ा जाए तो किसी आर्इ0एस0आर्इ0 एजेन्ट का ही जान पड़ता है। 1
सोनिया द्वारा नौकरानी रहते हुए राजीव गाँधी को उधार दिया जाना - आप शायद विश्वास न कर पाएं कि एक होटल मे काम करने वाली मामूली सी लड़की भारतीय प्रधानमंत्री के पुत्र को पैसा उधार दे। परंतु प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनिया के पास इतना धन आ गया था कि उसने राजीव गाँधी को पैसा उधार दिया। शायद राजीव को जो पैसा घर से दिया जाता था वो उससे ज्यादा खर्च करते थे। इंदिरा गाँधी ने इस बात की चर्चा स्वयं डा0 सुब्रमण्यम स्वामी से एक चाय मुलाकात के दौरान की थी। राजीव गाँधी का संजय गाँधी को पत्र जिसमें उसने इस उधार की बात को स्वीकार किया था तथा इस उधार से बाहर निकालने की बात कही थी भी महत्वपूर्ण हैं। यहां आपको यह बताता चलूं कि उस समय भी संजय गाँधी के पास पर्याप्त धन हुआ करता था। 1
सोनिया के लंदन में अन्य पुरुष मित्र - ऐसा नही है कि केवल राजीव गाँधी ही सोनिया से मिलने वाले उनके पुरुष मित्र थे। उनसे मिलने वाले अन्य पुरुष मित्रों में माधवराव सिंधिया तथा एक जर्मन पुरुष स्टीगलर प्रमुख थे जो कि सोनिया के घनिष्ठ मित्रों में थे। सोनिया गाँधी की माधवराव सिंधिया से मित्रता राजीव से विवाह के पश्चात भी लंबे समय तक जारी रही। 1
माधवराव सिंधिया व सोनिया गाँधी का कार एक्सीडेंट - 1982 मे आर्इ0आर्इ0टी0 गेट दिल्ली के पास माधवराव सिंधिया की कार का एक्सीडेंट हो गया उस समय सोनिया मात्र दूसरी यात्री कार में उपलब्ध थी। जिस समय कार का एक्सीडेंट हुआ उस समय रात्रि के दो बज रहे थे। दोनो को काफी चोटें लगी थी। एक आर्इ0आर्इ0टी0 का छात्र जो कि रात्रि में पढ़ार्इ कर रहा था वो बाहर काफी पीने आया था। उसने इन्हे कार से बाहर निकाला तथा सोनिया गाँधी को जो की काफी जख्मी थीं उनकी इच्छा पर प्रधानमंत्री निवास भेज दिया तथा माधवराव सिंधिया जिनका की पैर टूट गया था तथा काफी चोट आर्इ थी तथा कुछ भी कहने की सिथति में नही थे को दिल्ली पुलिस ने आकर अस्पताल भेज दिया। माधवराव सिंधिया सोनिया गाँधी के धीरे-धीरे आलोचक होते जा रहे थे तथा उन्होने अपने निकटवर्ती मित्रों से सोनिया के सम्बन्ध मे संदेह जाहिर किया था। 1 वायु दुर्घटना मे उनकी रहस्यपूर्ण परिसिथतियों में मौत एक गंभीर घटना है। अब तो गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने भी यह बताया है कि उनकी वायु दुर्घटना महज एक हादसा नही थी। 4
इंदिरा के द्वारा राजीव का सोनिया से शादी का विरोध - जिस प्रकार से जल्दबाजी में राजीव गाँधी द्वारा सोनिया से ओरबासानो की चर्च में विवाह किया गया वह संदेहपूर्ण तो है परंतु कुल मिलाकर वह उनका व्यकितगत मामला था जिसका की सार्वजनिक जीवन पर कोर्इ असर पड़ने नही जा रहा परंतु वह बात जो कि सार्वजनिक महत्व की है वह यह कि इंदिरा गाँधी स्वयं इस विवाह के सख्त खिलाफ थीं तथा वे इस विवाह के लिए तभी तैयार हुर्इं जब सोवियत समर्थक श्री टी0एन0 कौल ने इंदिरा गाँधी को भारत रुस मैत्री संघी प्रगाढ़ करने के लिए इस विवाह के लिए हां कहने के लिए दवाब डाला। अब यह आसानी से समझा जा सकता है कि श्री टी0एन0 कौल ने ऐसा कोर्इ दवाब डाला था तो उसके पीछे सोवियत संघ का आदेश अवश्य रहा होगा। अगर हम पिछले दो वषोर्ं के घटनाक्रम को देखें तो यह बात और स्पष्ट हो जाती है कि सोनिया के रुस से विशेष सम्बन्ध हैं। इसकी पुष्टी काँग्रेस सरकार द्वारा सोवियत संघ से सामान की खरीद में भारी रिश्वत खाने से लेकर सोनिया गाँधी द्वारा बिना किसी विशिष्ट हैसियत के रुस की यात्रा करने से होती है। 1
सोनिया राजीव विवाह - सोनिया गाँधी राजीव गाँधी से कहां मिली होंगी इस सबध में अनुमानों को उपर वर्णित किया जा चुका है। राजीव से जब उनका मिलन हुआ तो उनसे प्यार कर बैठीं। अगर हम जयललिता के शब्दों को उधार लें तो ज्यादा अच्छा होगा जिनके अनुसार सोनिया मैनो नामक महत्वाकांक्षी लड़की, जिसकी श्रेणी का निर्धारण नही किया जा सकता ने भारत के प्रिंस आफ वेल्स को अपने प्यार के जाल में फाँस लिया। ये भारतीय प्रिंस आफ वेल्स वहां पढ़ार्इ मे नही बलिक विदेशी लड़कियों की तलाश में अपना धन बरबाद कर रहे थे। प्यार का बुखार भारतीय प्रिंस आफ वेल्स को इतना तगड़ा था की तीन वषोर्ं तक लगातार उन्होने कैमिब्रज में फेल होने की हैटि्रक बनार्इ तथा उसके बाद नाम काटकर वहां से भारतीय प्रिंस आफ वेल्स को भगा दिया गया। खैर चाहे पड़ार्इ लिखार्इ में शून्य ही साबित हुए हो परंतु प्यार के क्षेत्र में उन्होन एक ऐसी लड़की से प्यार करके नये कीर्तिमान स्थापित किये जो कि न तो हिन्दी जानती थी न ही अंग्रेजी। हालांकि अंग्रेजी सीखना एक स्थानीय रात्रिकालीन कक्षाओं में उसने प्रारंभ कर दिया था।
जब इंदिरा गाँधी को पता चला कि उनके होनहार-वीर्यवान उर्फ भारतीय प्रिंस आफ वेल्स ने अपने लिए राजकुमारी ढूंढ़ ली है तो उन्होने मोहम्मद युनुस को लड़की को देखने के लिए भेज दिया। आखिर यह मोहम्मद युनुस कौन हैं? इनके सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा करना इस किताब में असंभव है परंतु आपकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए मोहम्मद युनुस का संक्षिप्त परिचय आपको अवश्य देता चलूं।
मोहम्मद युनुस ने अपनी किताब 'परसन पैसन एण्ड पालटिक्स में बताया है कि संजय गाँधी की परवरिश इस्लामी रीतिरिवाज के अनुरुप की गयी थी। इस्लामी तरीके से संजय गाँधी की परवरिश क्यों की गयी इसके लिए उन्होने कुछ कारण भी गिनाएं हैं जो कि हजम नही होते। जब संजय गाँधी की मृत्यु हुर्इ तो सबसे ज्यादा रोने वाला व्यकित कोर्इ और नही बलिक मोहम्मद युनुस ही थे। मोहम्मद युनुस के लड़के तथा संजय गाँधी में भार्इयों के समान प्यार था। संजय गाँधी का विवाह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के घर से नही बलिक मोहम्मद युनुस के घर से हुआ था। यह भी एक बहू प्रचारित तथ्य है कि राजीव गाँधी के जन्म के बाद फिरोज व इंदिरा अलग अलग रहने लगे थे। इन्ही सब कारणों की वजह से बहूत से लोग संजय गाँधी को मोहम्मद युनुस के पुत्र के समान मानते हैं। अब पाठक समझ गये होंगे कि इंदिरा गाँधी ने मोहम्मद युनुस को सोनिया गाँधी को देखने को क्यों भेजा था।
सोनिया का विवाह राजीव गाँधी से 1968 में हुआ था। सोनिया भारत की नागरिक विवाह के पंæह वर्ष उपरांत 30 अप्रैल 1983 को बनी। राजीव गाँधी की मौत के बाद सोनिया गाँधी राजनीति से बाहर ही रहीं तथा उनका राजनीति में पदार्पण 1998 में हुआ। इस अफवाह से सोनिया ने आज तक इंकार नही किया है कि उन्होने इटली की नागरिकता नही छोड़ी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि भारत का संविधान दोहरी नागरिकता प्रदान नही करता।
सोनिया गाँधी के रुस की गुप्तचर संस्था के0जी0बी0 सें सम्बन्ध - सोवियत संघ जो कि शीतयुद्ध के दौर में भारत से सम्बन्ध सुधारना चाहता था तथा भारत को अपने खेमें में लाने के लिए प्रयासरत था उस समय रुस की गुप्तचर संस्था भारत कि प्रधानमंत्री इंदरागाँधी के पुत्र पर नजर न लगाये बैठी होगी संभव नही दिखता। तथा जब सोवियत संस्था को इस बात का पता चला होगा कि सोनिया स्टीफानो मैनो जो कि सोवियत समर्थक व्यकित है की पुत्री है तो उन्होने उसका इस्तेमाल करने में कोर्इ कसर नही छोड़ी होगी। चंूकी सोनिया का प्रयोग करके के0जी0बी0 आसानी ने प्रधानमंत्री के निवास की सभी गतिविधियों पर न केवल नजर रख सकती थी बलिक उसका प्रयोग भी कर सकती थी। इससे स्पष्ट हो जाता है कि सोनिया राजीव सम्बन्ध को मजबूती प्रदान करना सोवियत हितों के अनुकूल था। 1
सोनिया का राजीव से विवाह होने के बाद इंदिरा गाँधी की सरकार ने बहूत से रक्षा सौदे सोवियत संघ के साथ किये तथा भरपूर कमीशन प्राप्त किया।
गुप्तचरों का सिकिकम में सक्रिय होना - सोनिया गाँधी के इतिहास की बहूत सी बातें काफी मसालेदार तथा सतर्क कर देने वाली हैं। यह भी कहा जाता है कि सोनिया गाँधी रुस की गुप्तचर संस्था के0जी0बी0 तथा इटली की गुप्तचर संस्था ओपेस डार्इ का अमेरिका की सी0आर्इ0ए0 के कारनामों का संयुक्त जवाब हो सकती हैं। आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका की गुप्तचर संस्था ने क्या किया? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे तत्कालीन पड़ोसी देश सिकिकम में पूर्व राजा ने अपने राजकुमार को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए एक अमेरिकी महिला मिस कुक को नियुक्त किया था। असलियत में मिस कुक अमेरिका की गुप्तचर संस्था सी0आर्इ0ए0 के लिए काम किया करती थी। मिस कुक पढ़ाते पढ़ाते अपने छात्र से अपनी सुविधा तथा आवश्यकता के अनुरुप प्यार कर बैठीं। जिसकी परिणीति दोनो के विवाह के रुप में सामने आर्इ। श्रीमति कुक ने राजकुमार के बच्चों को भी जन्म दिया। लगभग दो दशक बाद सिकिकम के राजा को पता चला कि श्रीमति कुक सी0आर्इ0ए0 की एजेंट थीं तथा सी0आर्इ0ए0 के लिए जासूसी कर रही थीं। श्रीमति कुक को तलाक देकर सिकिकम से बाहर निकाल दिया गया।
डा0 येवगेनी एल्बेटस का स्कीवीटजर इलुस्ट्रेट समाचार पत्रिका में पर्दाफास - स्वीटजरलैंड की प्रसिद्ध प्रत्रिका स्केविटजर इलुस्ट्रेट के नवम्बर 1991 के अंक में छपी खबर के अनुसार राजीव गाँधी के पास स्वीस बैंक में लगभग 2 बिलियन डालर रुपये नंबर से चलने वाले खाते में मौजूद था। यह खाता राजीव के मरने पर सोनिया को प्राप्त हो गया। डा0 ऐवगेनिया एल्बेटस जो कि हावर्ड विश्वविधालय से पी0एच0डी0 उपाधी प्राप्त हैं एक प्रसिद्ध रुसी विदुषी तथा पत्रकार हैं। उन्होने वे सभी दस्तावेज स्वयं देखी हैं जिसमें तमाम रक्षा सौदों की जानकारी थी तथा उसमें के0जी0बी0 का क्या योगदान रहा इसका वर्णन है। उन्होने अपनी किताब, ''द स्टेट विदइन ए स्टेट, द के0जी0बी0 इन सोवियत यूनियन में उन फार्इलों का नंबर तक दिया है जो कि इन सूचनाओं को लिए हुए हैं। भारत सरकार अगर चाहे तो इन दस्तावेजों को रुस की सरकार से आग्रह करके मांग सकती है। 1
जब 1992 में रुस की सरकार से एल्बेटस के द्वारा जो भंडाफोड़ किया गया था उसके सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होने अपने आधिकारिक प्रवक्ता के द्वारा यह बात स्वीकार की थी कि इस प्रकार के सौदों में धन दिया जाता था क्योंकि यह सोवियत हित के अनुकूल था। यह बात 1992 में हिंदू समाचार पत्र में प्रकाशित भी हुर्इ थी। 1
जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया उस समय सोनिया गाँधी के लिए परिसिथतियाँ पूर्णत: बदल गयी। उनके संरक्षक समाप्त हो गये। विघटन के बाद जो रुस बचा वह वित्तीय दुर्दशा एवं बूरी हालत में था। 1
वर्तमान रुसी राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन पुराने के0जी0बी0 के अधिकारी हैं। जैसे ही मनमोहन सिंह सरकार ने कार्यभार संभाला वैसे ही रुस सरकार ने अपने डिप्लोमेट को वापस बुलाकर एक ऐसे व्यकित को भारत का राजदूत बनाकर भेज दिया जो कि 1970 में भारत में के0जी0बी0 के अधिकारी के रुप में तैनात था। अगर डा0 एल्बेटस ने जो कुछ कहा है वह सहीं है तो जरुर यह राजदूत सोनिया के विषय में सबकुछ जानता होगा। यह भी हो सकता हो कि सत्तर के दशक में वही सोनिया को नियंत्रित करता रहा हो। नयी भारतीय सरकार में जिसमें कि सोनिया गाँधी की हैसियत सुपर प्रधानमंत्री की है किसी भी तरह से जोखिम उठाने की सिथति में नही है। ऐसी परिसिथति में भारत गंभीर असुरक्षा वातावरण में जी रहा है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण तब देखने को मिला जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत यात्रा पर परमाणु समझौता भारत के साथ हस्ताक्षर किया। स्वाभाविक है अमेरिकी राष्ट्रपति को यह आशा रही होगी कि भविष्य में भारत में परमाणु सौदों में उन्हे वरियता मिलेगी। परंतु मेहनत करे मुर्गा व अंडा खाये फकीर की तर्ज पर रुस के प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर आये तथा परमाणु र्इंघन आपूर्ती का ठेका लेकर चले गये। देखने में ऐसा लगता है कि रुस की मैत्री की वजह से भारत को भारी लाभ हुआ होगा परंतु वास्तविकता कुछ और ही है। वास्तविकता यह है कि रुस ने भारत को बहूत ही घटिया स्तर का सामान बेचा है जिसमें मिग विमान प्रमुख हैं। ये मिग विमान युद्ध के समय अपनी कुशलता को लेकर नही बलिक अपनी दुर्घटना को लेकर ही सदैव समाचार में बने रहते हैं। वास्तविकता यह है कि अब तक लगभग सात सौ मिग विमान दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं तथा यह रुस के खरीदे गये कुल विमानों की संख्या के चालीस प्रतिशत से अधिक है। आज इन मिग विमानों को उड़ते ताबूत के नाम से देश में ज्यादा जाना जाता है।
मैनो परिवार का रातो रात अरबों का असमी बन जाना - सोनिया विवाह के बाद भारतीय नियम कानूनों को ताक पर रखकर पैसा बनाने में जुट गयी। वो मैनो परिवार जो कि गरीबी के फाँके झेल रहा था तथा जिनके यहां की लड़की पैसा कमाने के लिए अपना देश इटली छोड़कर इंगलैंड आकर नौकरानी का कार्य कर रही थी वह मैनो परिवार सोनिया की राजीव से विवाह के बाद रातों रात अरब पति बन गया।
सबसे अंतिम सत्य यह है कि सोनिया को जिस दिन लगेगा कि उसको भारत में खतरा है उसी दिन वह इटली वापस भाग सकती है। पेरु के पूर्व राष्ट्रपति अलबर्ट फुजीमोरी जो कि अपने को सोनिया की तरह ही पेरु देश का परम नागरिक बताते नही थकते थे उनके विरुद्ध जैसे ही भष्टाचार के आरोप लगे तथा कार्यवाही प्रारंभ की गयी वे भागकर जापान चले गये। तथा अपने को जापान का नागरिक बताने लगे। 1
वे लोग जिन्हे भारत से कोर्इ लगाव नही है वो भारत की संपदा को कभी भी लूट कर भाग सकते हैं। मोहम्मद गौरी, नादिर शाह तथा बि्रटिश र्इस्ट इंडिया कंपनी का उदाहरण हमारे सामने है। परंतु सोनिया गाँधी कुछ ज्यादा समझदार है परंतु देश को लूटने के मामले में किसी भी तरह से कम नही। जब इंदिरा व राजीव प्रधानमंत्री थे उस समय ऐसा कोर्इ दिन नही जाता होगा जब बिना जाँच के डिब्बों में भर-भर कर सामान दिल्ली तथा चेन्नर्इ अंतर्राष्ट्रीय हवार्इ अडडे से रोम न जाता होगा। यह समान एयर इंडिया तथा एलिटेलिया जहाजों से जाता था। काँग्रेस के नेता अर्जन सिंह पहले मुख्यमंत्री के रुप में तथा बाद में केन्æीय मंत्री के रुप में सोनिया के कायोर्ं को अंजाम दिया करते थे। यहां से पुरातातिवक महत्व की बहूत सी वस्तुओं को पहले इटली की दो दुकानों जिनका संचालन सोनिया गाँधी की बहन अनुस्का उर्फ अलेजांड्रा किया करती थी में पहुचाया जाता था। इन दुकानों के नाम रिवोल्टा में एटनिका तथा ओरबासानो में गणपति नाम के थे। यहां से झूठा बिल बनाकर इन सामानों को सोथबीज तथा क्रिस्चीज को बेच दिया जाता था तथा इन्हे लंदन नीलामी द्वारा बिक्री हेतु भेज दिया जाता था। इसमें से कुछ धन राहुल गाँधी के नेशनल वेस्टमिनिस्टर बैंक तथा हांगकांग एन्ड संघार्इ बैंक के लंदन सिथत खाते में जमा हो जाता था। परंतु इसमे से ज्यादातर धन केमेन द्वीप सिथत बैंक आफ अमेरिका के गाँधी परिवार के खाते में चला जाता था। 1
राहुल के खर्चे के लिए तथा उसकी एक वर्ष की टयूशन फीस जिस वर्ष वह हावर्ड में था केमेन द्वीप सिथत बैंक के खाते से ही दी गयी थी। गाँधी मैनो परिवार के लोग किस प्रकार के लोग हैं जो कि उस भारत माता का ही हाथ काट रहें हैं जिनसे उन्हे भोजन प्राप्त हो रहा है। हम इस प्रकार के लालची चोरों पर किस तरह विश्वास कर सकते हैं। 1

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